जयपुर/उदयपुर – कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास का बुधवार को अहमदाबाद के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 79 वर्ष की थीं। व्यास पिछले महीने उदयपुर स्थित अपने घर में गणगौर पूजा के दौरान आग की चपेट में आ गई थीं और करीब 89% तक झुलस गई थीं। इसके बाद उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए उदयपुर और फिर अहमदाबाद के ज़ाइडस अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
डॉ. गिरिजा व्यास का जन्म 8 जुलाई 1946 को नाथद्वारा में हुआ था। वे राजस्थान प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष, लोकसभा सदस्य और केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुकी थीं। उन्होंने सूचना एवं प्रसारण, पर्यटन और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया। इसके अलावा वे राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष भी रहीं और महिलाओं के अधिकारों के लिए मुखर रहीं।
राजनीति के अलावा वे एक शिक्षाविद और लेखिका भी थीं। उन्होंने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में शिक्षा प्राप्त की और यहीं प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। वे हिंदी और अंग्रेज़ी में कई किताबें लिख चुकी थीं और कविता लेखन में गहरी रुचि रखती थीं।
गिरिजा व्यास का अंतिम संस्कार शुक्रवार को उदयपुर में राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
राजनीतिक जगत में शोक
डॉ. व्यास के निधन पर विभिन्न दलों के नेताओं ने गहरा शोक जताया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, गोविंद सिंह डोटासरा, गजेंद्र सिंह खींवसर और हनुमान बेनीवाल समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उन्हें “शिक्षा, समाजसेवा और राजनीति में अनुकरणीय योगदान देने वाली नेता” बताया। वहीं, पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने भी दुख व्यक्त करते हुए बताया कि उनका और गिरिजा व्यास का छात्र जीवन से ही गहरा संबंध रहा है।
गिरिजा व्यास के निधन को नारी सशक्तिकरण, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है।

