राजस्थान में भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़े मामलों की जांच में एक अहम अड़चन सामने आई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई हालिया समीक्षा बैठक में यह खुलासा हुआ कि पिछले छह वर्षों से 152 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की फाइलें सरकारी विभागों में लंबित हैं। इन मामलों में पूछताछ या अभियोजन की स्वीकृति अब तक नहीं मिल पाई है।
इन लटकी फाइलों में 22 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और 52 राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारी भी शामिल हैं। नियमों के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की अनुमति राज्य के कार्मिक विभाग से ली जाती है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, कई विभाग इस प्रक्रिया में गंभीरता नहीं दिखा रहे।
जांच एजेंसियां जांच को लेकर विवश
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य पुलिस जैसी एजेंसियों ने जिन मामलों में अनुमति मांगी है, वे फाइलें अभी तक कार्मिक विभाग सहित नगरीय विकास, राजस्व, पंचायती राज, सहकारिता, वित्त, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, परिवहन और ग्रामीण विकास जैसे 16 प्रमुख विभागों में अटकी हुई हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इनमें से कई अफसर ट्रैप केस, पद के दुरुपयोग, आय से अधिक संपत्ति, मनी लॉन्ड्रिंग और रिश्वतखोरी जैसे मामलों में संदेह के घेरे में हैं, लेकिन अनुमति नहीं मिलने से जांच आगे नहीं बढ़ पा रही।
कुछ सुधार, पर IAS अधिकारी अब भी बचे
जनवरी से अप्रैल 2025 के बीच राज्य सरकार ने 47 मामलों में पूछताछ और अभियोजन की मंजूरी दी है, जो कि इससे पहले की तिमाही में केवल 4 मामलों के मुकाबले काफी अधिक है। लेकिन चिंता की बात यह है कि इनमें से एक भी मामला किसी IAS अधिकारी से संबंधित नहीं है।
वर्तमान में सरकार के पास 107 मामलों की फाइलें लंबित हैं, जिनमें 22 IAS, 2 IFS, 52 RAS, 1 RPS, 3 RACS और अन्य 27 अधिकारी शामिल हैं। इनमें से 8 IAS अधिकारियों के मामलों की समीक्षा कार्मिक विभाग में चल रही है, जबकि 14 मामलों में संबंधित विभागों और ACB से रिपोर्ट मांगी गई है।
समय पर कार्रवाई नहीं, तो अधिकारी हो जाते हैं रिटायर
जानकारों का मानना है कि स्वीकृति में देरी जांच की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करती है। कई बार आरोपी अधिकारी सेवानिवृत्त हो जाते हैं और कार्रवाई अधूरी रह जाती है, जिससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना मुश्किल हो जाता है।
अब सरकार के सामने बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक सवाल यह है कि उच्च अधिकारियों के खिलाफ जांच प्रक्रिया को कैसे तेज और पारदर्शी बनाया जाए ताकि भ्रष्टाचार के मामलों में समयबद्ध न्याय सुनिश्चित हो सके।

