केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में जानकारी दी कि जम्मू-कश्मीर की बैसरन घाटी में 26 पर्यटकों की हत्या में शामिल तीनों आतंकियों को सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत की गई।
गृह मंत्री ने बताया कि मारे गए आतंकियों की पहचान लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर सुलेमान, फैजल अफगान और जिब्रान के रूप में हुई है। इनमें से फैसल अफगान और जिब्रान ‘ए श्रेणी’ के आतंकी थे और तीनों पहलगाम हमले में शामिल थे।
तीन महीने तक चला ऑपरेशन
शाह ने कहा कि 23 अप्रैल को एक उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक में फैसला लिया गया था कि हमले में शामिल आतंकियों को किसी भी कीमत पर पाकिस्तान भागने नहीं दिया जाएगा। इसके बाद इंटेलिजेंस एजेंसियों और सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके में सतर्कता बढ़ा दी।
22 मई को इंटेलिजेंस ब्यूरो को आतंकियों की मौजूदगी को लेकर शुरुआती संकेत मिले। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने लगातार दो महीने तक जानकारी की पुष्टि के लिए प्रयास किए।
अंततः 22 जुलाई को दाचीगाम इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि हुई और 28 जुलाई को सुरक्षाबलों ने उन्हें घेर कर मार गिराया।
पुख्ता सबूत जुटाए गए
गृह मंत्री ने बताया कि आतंकियों के शवों की पहचान तीन चश्मदीदों से करवाई गई। इसके बावजूद पुलिस ने जल्दबाज़ी नहीं की और फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए।
हमले के समय इस्तेमाल हुए कारतूसों का मिलान मुठभेड़ में बरामद हथियारों से किया गया, जो चंडीगढ़ की फॉरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजे गए थे। जांच में यह पुष्टि हुई कि पहलगाम हमले में इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।
पाकिस्तान से जुड़ाव के संकेत
शाह ने संसद को बताया कि आतंकियों के पास से पाकिस्तान में बनी चॉकलेट बरामद की गई। इसके अलावा दो आतंकियों के पास पाकिस्तानी वोटर आईडी नंबर भी मिले हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि वे पाकिस्तानी नागरिक थे।
गृह मंत्री ने कहा कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान सरकार ने पूरी गंभीरता से काम लिया और सबूतों के आधार पर ही आगे बढ़ा। उन्होंने संसद में सभी प्रमाण पेश करने की बात भी कही।

