जयपुर, 29 सितम्बर। भरतपुर और सीकर जिले में खांसी की सिरप से उल्टी, नींद, घबराहट, चक्कर, बेचौनी एवं बेहोशी संबंधी शिकायत पर राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम (आरएमएससीएल) ने सिरप के बैच के वितरण व मरीजों के उपयोग हेतु तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही, औषधि नियंत्रण, राजस्थान को बैचों के वैधानिक नमूने लेकर गुणवत्ता जांच राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला से करवाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने भरतपुर और सीकर जिले में खांसी की सिरप की गुणवत्ता संबंधी शिकायत का मामला संज्ञान में आते ही राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम (आरएमएससीएल) को गंभीरता से जांच कर तत्काल आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में आरएमएससीएल प्रबंधन ने तत्काल कार्यवाही करते हुए उक्त दवाई के बैच औषधि Dextromethorphan HBr Syrup IP 13.5mg / 5ml (440) पर रोक लगा दी है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि उक्त सिरप के बैच का संबंधित औषधि नियंत्रण अधिकारी के माध्यम से वैधानिक नमूना लिया जाकर गुणवत्ता जांच हेतु भिजवा दिया गया है। उन्होंने बताया कि राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला से बैचों की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर नियमानुसार निगम द्वारा अग्रिम कार्यवाही पकी जाएगी। साथ ही निगम द्वारा प्रभावी कदम उठाते हुए उक्त औषधि के संबंधित सप्लायर द्वारा सप्लाई किये गए अन्य 19 बैचों पर भी तत्काल प्रभाव से उपयोग पर रोक लगा दी गई है।
प्रबंधक निदेशक आरएमएससीएल श्री पुखराज सैन ने बताया कि मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत सप्लाई की जाने वाली प्रत्येक औषधि के प्रत्येक बैच की गुणवत्ता नीति अनुसार राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम द्वारा गुणवत्ता जांच निगम की अनुमोदित प्रयोगशाला द्वारा करवायी जाती है। औषधि के गुणवत्ता मानकों में खरा उतरने पर ही औषधि को अस्पतालों में वितरण हेतु उपलब्ध करवाया जाता है। किसी औषधि के गुणवत्ता जांच में अमानक कोटि का पाये जाने पर औषधि को निगम द्वारा वितरित नहीं किया जाता है। सामान्य प्रक्रिया के तहत भी किसी भी औषधि की गुणवत्ता जांच मानकानुसार न पाये जाने पर राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला से पुनः गुणवत्ता जांच करवायी जाती है। इसके अतिरिक्त किसी भी दवा की गुणवत्ता को लेकर कोई भी शिकायत सामने आती है तो उस दवा की फिर से जांच करवाई जाती है।

