NEP-2020 के क्रियान्वयन की ओर राजस्थान का महत्वपूर्ण कदम—‘मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान’ लॉन्च; 4 घटक,41 कार्यों के साथ शिक्षा सुधार का राज्य मॉडल उजागर,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में नई पहलें।

Jaipur
जयपुर, 29 नवम्बर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में ‘मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान’ (एमएसआरए) की शुरुआत की है। इस तरह का व्यापक अभियान प्रारंभ करने वाला राजस्थान देश में पहला राज्य है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 29 मार्च 2025 को राजस्थान दिवस साप्ताहिक कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित समारोह में शिक्षा विभाग के इस महत्वाकांक्षी अभियान का शुभारम्भ किया था। 

यह अभियान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश को एक मॉडल स्टेट के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सशक्त पहल है। इस अभियान को शैक्षणिक सत्र 2025-26 से चरणबद्ध रूप से लागू किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, सरकारी विद्यालयों में नामांकन वृद्धि, छात्रों की रोजगारोन्मुखी शिक्षा में सुधार, डिजिटल मॉनिटरिंग से बच्चों की प्रगति पर नजर, पाठ्य सामग्री, गणवेश आदि के समय पर वितरण, शैक्षणिक परिणामों में सुधार व विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के संवर्धन पर काम किया जा रहा है।

मेगा पीटीएम: अभिभावकों व शिक्षकों को एक मंच पर लाने की हो रही पहल
मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान में स्कूलों के प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, एसएमसी व एसडीएमसी सदस्यों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, मेगा पीटीएम के माध्यम से अभिभावकों व शिक्षकों को एक मंच पर लाने की पहल की गई है। वहीं एआई आधारित ओआरएफ द्वारा बच्चों का वर्गीकरण कर उन्हें प्रखर 2.0 के तहत रीडिंग रेमेडिएशन के माध्यम से पठन में दक्ष बनाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग की ओर से संचालित प्रखर व निपुण जैसे अभियानों से भी इस पहल के माध्यम से विद्यार्थियों के विकास को नई गति मिल रही है। इस तरह यह पहल विद्यालयी शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के साथ ही समाज के प्रत्येक वर्ग को शिक्षा से जोड़ने में भी सहायक सिद्ध हो रही है।

विद्यार्थी, विद्यालय, शिक्षक एवं परिणाम आधारित 4 प्रमुख घटक
अभियान के चार प्रमुख घटक निर्धारित किए गए हैं, जिसके अंतर्गत 41 कार्य पूर्ण किए जाएंगे। पहले घटक ‘विद्यार्थी केंद्रित कार्य’ के अंतर्गत 8 कार्य किए जाएंगे, जो सीखने की प्रवृति को सशस्त करने के लिए नियमित ऐप बेस उपस्थिति, सत्र के प्रारंभ में पाठ्य पुस्तकें, गणवेश और प्रोत्साहन राशि का वितरण, पढ़ने की स्थायी आदत के लिए रीडिंग कैंपेन, नियमित मेगा पीटीएम, नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए महापुरूषों के प्रेरक प्रसंग सुनाना, घुमन्तू एवं अर्द्ध घुमन्तू परिवारों के बच्चों के लिए ‘स्कूल ऑन व्हील’ और बेहतर स्वास्थ्य के लिए नियमित एवं पेपरलैस डिजिटल स्वास्थ्य सर्वे करवाया जाना हैं।

दूसरे घटक ‘विद्यालय केंद्रित कार्य’ में शून्य नामांकन वाले विद्यालयों का एकीकरण, बुनियादी सुविधाओं वाले विद्यालयों को मेंटर स्कूल बनाना, आईसीटी लैब के जरिए शिक्षण की वैकल्पिक व्यवस्था, शिक्षक परिणाम सुधार वाले विद्यालयों का सम्मान, नवीन विद्यालय खोलने से पूर्व पद/स्टाफ की उपलब्धता व विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग अलग टॉयलेट की व्यवस्था शामिल है। 

तीसरे घटक ‘शिक्षक केंद्रित कार्य’ के तहत स्टाफिंग पैटर्न तथा शिक्षकों का समानीकरण, बेहतर परिणाम देने वाले शिक्षकों का इच्छित स्थान पर स्थानांतरण, नवीन तकनीकी प्रणाली का विकास, एआई चौटबॉट से डेटा एवं समीक्षात्मक विश्लेषण व शिक्षक/कार्मिकों की ऑनलाइन उपस्थिति एवं समयबद्ध पदोन्नति के कार्य किए जाएंगे। 

चौथे घटक ‘शैक्षणिक परिणाम के उन्नयन केंद्रित कार्य’ के तहत नई अकादमिक संरचना, प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा में पढ़ाई, आंगनबाड़ी केंद्रों का विद्यालयों से समन्वय, समेकित दक्षता आधारित आकलन एवं कार्य पुस्तिकाओं का निर्माण, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास पाठ्यक्रम, डिजिटल माध्यम से शिक्षण की निरन्तरता और विद्यालयों में विज्ञान संकाय एवं कम्प्यूटर विषय की उपलब्धता के कार्य किए जाएंगे। 

प्रदेश में बदलेगी शिक्षा व्यवस्था की सूरत

मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान से विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा एवं बच्चों की सीखने की क्षमता में वृद्धि होगी। शिक्षकों को प्रशिक्षण एवं संसाधन उपलब्ध कराए जाने से उनकी दक्षता भी बढ़ेगी। प्रधानाचार्यों एवं एसएमसी की भागीदारी से विद्यालय प्रबंधन के अधिक प्रभावी होने के साथ ही स्थानीय समुदाय के जुड़ाव से शिक्षा को सामाजिक आंदोलन का नया स्वरूप मिलेगा। इनके परिणामस्वरूप बच्चों का स्कूल से जुड़ाव, नामांकन एवं उपस्थिति दर में वृद्धि होगी और ड्रॉपआउट दर घटेगी। अभियान से राज्य के दूरस्थ व वंचित वर्गों तक शिक्षा की पहुंच भी सुनिश्चित होगी।