जयपुर:राजस्थान सरकार ने बिजली सेवाओं को आमजन के लिए अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग पर जोर दिया है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा है कि राज्य सरकार की नीतियों के चलते प्रदेश का ऊर्जा क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और अब डिजिटल माध्यमों से ऊर्जा ढांचे को और मजबूत किया जाएगा।
ऊर्जा मंत्री जयपुर के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित राजस्थान पावर सेक्टर डिजिटल कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों में तेजी के साथ बिजली की मांग भी बढ़ी है, ऐसे में विद्युत निगमों और उनके आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करना जरूरी हो गया है।
कॉन्क्लेव में प्रमुख शासन सचिव (ऊर्जा) अजिताभ शर्मा ने कहा कि पावर सेक्टर में डेटा एनालिसिस की भूमिका लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के गांव-ढाणी तक फैले लाखों किलोमीटर लंबे बिजली नेटवर्क, ट्रांसफार्मरों और ग्रिड सब-स्टेशनों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना समय की आवश्यकता है, ताकि उपभोक्ताओं तक बेहतर सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
राजस्थान ऊर्जा विकास निगम और आईटी सर्विसेज की ओर से बताया गया कि इस कंसल्टेशन मीट के जरिए प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसके तहत ईआरपी सिस्टम, डिस्कॉम परिसंपत्तियों की जीआईएस आधारित मैपिंग, पावर ट्रांसफार्मरों की हेल्थ मॉनिटरिंग, साइबर सुरक्षा और नेटवर्क ऑपरेशन सिस्टम जैसे करीब 700 करोड़ रुपये के कार्य प्रस्तावित हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत में ऊर्जा विभाग ने प्रदेश में लागू डिजिटल प्रणालियों पर प्रस्तुतीकरण दिया। इस अवसर पर उत्पादन निगम के सीएमडी देवेन्द्र श्रृंगी और संयुक्त शासन सचिव सौरभ स्वामी भी मौजूद रहे।
इस कॉन्क्लेव में ऑरेकल, इन्फोसिस, आईबीएम, एक्सेंचर, सैप और टेक महिंद्रा जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

