कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान के निर्देश के बाद उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। अब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो गई है और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना पहुंच रही है।
बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने “स्वेच्छा से” इस्तीफा दिया है और वे सक्रिय राजनीति में बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा जाने का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं आखिरी सांस तक कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहूंगा।”
त्याग से पहले मुख्यमंत्री आवास ‘कावेरी’ में कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों की बैठक हुई। बैठक के दौरान डीके शिवकुमार द्वारा सिद्धारमैया के परित्याग और दोनों नेताओं के गले मिलने को सत्ता परिवर्तन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सिद्धारमैया ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वे किसान परिवार से आते हैं और कभी मुख्यमंत्री बनने की कल्पना नहीं की थी। उन्होंने संविधान निर्माता बी. आर. अंबेडकर को याद करते हुए कहा कि संविधान ने उन्हें यह अवसर दिया। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व — सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे — का भी आभार जताया।
उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि कांग्रेस ने 2023 के चुनावी घोषणापत्र में किए गए 550 से अधिक वादों में से लगभग 300 पूरे कर दिए हैं। सिद्धारमैया ने कहा कि राज्य की अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष के आरोप “भ्रामक” हैं और कर्नाटक देश में जीएसटी संग्रह के मामले में दूसरे स्थान पर है।
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा पिछले कई महीनों से चल रही थी। 2023 में कांग्रेस की जीत के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच लंबी खींचतान हुई थी। तब पार्टी के भीतर “ढाई-ढाई साल” के कथित पुलिसकर्मियों की चर्चा हुई थी, हालांकि कांग्रेस ने कभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की।
अब कांग्रेस विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन के साथ राज्य मंत्रिमंडल में भी बड़े फेरबदल हो सकते हैं।

