जयपुर, 19 जून। उप मुख्यमंत्री तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री दिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में तथा महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार के विशिष्ट आतिथ्य में शुक्रवार को महिला एवं बाल विकास विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर में स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्र अवसंरचना पहल हेतु सीएसआर भागीदारी कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत CSR सहयोग जुटाना है। कार्यशाला में राजस्थान में आंगनबाड़ी केंद्र पर प्रदान की जा रही सेवाओं एवं आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत सुविधाओं में सुधार करने हेतु कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के फंड का उपयोग कर नवीन तकनीक युक्त LGSF (लाइट गेज स्टील फ्रेम) प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर्स तथा कंटेनर आंगनबाड़ी के संचालन की रूपरेखा पर चर्चा की गई। साथ ही जानकारी दी गई कि भारत सरकार द्वारा पंखुड़ी पोर्टल 8 जनवरी 2026 को लॉन्च किया गया है। यह एक एकीकृत डिजिटल मंच है, जो पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा हेतु पारदर्शी, गैर-नकद CSR योगदान सक्षम बनता है।
कार्यशाला में WCD विभाग, ICDS के वरिष्ठ अधिकारी, Axis Bank, Shree Cement, Vedanta, Wonder Group, Adani Group, Tata Steel, NPCIL, SBI, ICICI Bank, Union Bank of India, Canara Bank, Hindustan Zinc, Hindustan Petroleum, Dell सहित प्रमुख कॉरपोरेट हाउस के प्रतिनिधि, पीएसयू, एनजीओ, तकनीकी विशेषज्ञ और जिला अधिकारी उपस्थित रहे। जिसमें अनुभव साझा करने, केस स्टडी और प्रभावी सीएसआर कार्यान्वयन हेतु ओपन हाउस चर्चा आयोजित की गई। इस अवसर पर विभिन्न कॉरपोरेट हाउसेज के प्रतिनिधियों ने उनकी कंपनी/संस्थान की ओर से दिए जा रहे सीएसआर योगदान तथा किये जा रहे नवाचारों की जानकारी दी।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के 2047 तक विकसित भारत के विजन अनुसार गरीब और कमजोर परिवार के बच्चों का भी सशक्तिकरण किया जाना अत्यंत आवश्यक है।सशक्त मानव संसाधन से सशक्त राष्ट्र का निर्माण होगा, इस हेतु हमें आंगनबाड़ियों को आधुनिक बनाना होगा, जिसमें सीएसआर फण्ड की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
दिया कुमारी ने कहा कि प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर्स तथा कंटेनर आंगनबाड़ी की नवीन तकनीक का उपयोग कर कुछ सप्ताह में ही आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कार्य किया जा सकता है, जिससे जर्जर आंगनबाड़ी केंद्रों की आधारभूत संरचना में अल्प समय में ही आशा अनुरूप परिवर्तन किये जा सकते हैं।
दिया कुमारी ने गुजरात में सीएसआर फण्ड के माध्यम से आंगबाड़ियों में हुए विकास कार्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के प्रयोग राजस्थान में भी किये जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट भागीदारों से शहरी एवं अर्ध-शहरी औद्योगिक क्षेत्रों में प्री-फैब्रिकेटेड आगंनबाड़ी भवनों के निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि “स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्र स्वस्थ सशक्त राजस्थान की नींव हैं, CSR सहयोग से जर्जर और किराये के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को ‘स्मार्ट प्ले स्कूल’ में अपग्रेड करना हमारा लक्ष्य है।
दिया कुमारी ने सीएसआर मद से आंगनबाड़ियों के विकास में योगदान देने के लिए कॉरपोरेट हाउसेज का आह्वान करते हुए कहा कि आंगनबाड़ियों को प्ले स्कूल में बदलने में योगदान कर राष्ट्र निर्माण की मुहीम में सहभागी बन सकते हैं।
राज्य मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं। हमारे बच्चों की नींव मजबूत करके देश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री का मानना है कि सीएसआर फंड का प्रयोग कर आंगनबाड़ियों को प्ले स्कूल में परिवर्तित कर गरीब बच्चों को भी बेहतर शाला पूर्व शिक्षा का वातावरण उपलब्ध करवाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पोषण वाटिकाओं का निर्माण और आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, फर्नीचर, खिलौने,शिक्षण सामग्री उपलब्ध करवाने तथा बच्चों के अनुकूल आंगनबाड़ियों में आधारभूत सुविधाएं विकसित करने में अपना योगदान देवें।
निदेशक आईसीडीएस वासुदेव मालावत ने बताया कि राजस्थान में 63,000 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 3,284 केंद्र जर्जर/क्षतिग्रस्त भवनों में और 11,488 केंद्र किराए या अस्थाई परिसरों में संचालित हैं। इनके समाधान हेतु LGSF तकनीक से मात्र 15-21 दिनों में सोलर युक्त, भूकंपरोधी स्मार्ट आंगनबाड़ी केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
कार्यशाला में विभाग के अधिकारियों द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र पर सेवा प्रदायगी में सीएसआर सहयोग हेतु आवश्यकताओं का प्रस्तुतीकरण किया गया।

