राजस्थान में आयोजित होने जा रहे लोकमंथन-2026 को लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि यह आयोजन राज्य की सांस्कृतिक पहचान और भारत की लोक परंपराओं को वैश्विक मंच पर नई पहचान देगा। जयपुर में आयोजित कर्टन रेजर कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि राजस्थान शक्ति, भक्ति, वीरता, विचार और लोक संस्कृति की धरती है, ऐसे में यहां लोकमंथन का आयोजन गर्व की बात है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हम भारत के लोग’ थीम पर आधारित यह आयोजन राष्ट्र सर्वोपरि की भावना से प्रेरित विचारोंकों, कलाकारों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और युवाओं को एक साझा मंच देगा। उनका कहना है कि इस बार लोकमंथन भारतीय सभ्यता के वैश्विक संवाद का माध्यम बनेगा, क्योंकि इसमें वैश्विक से भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि लोकमंथन का पांचवां संस्करण “दिव्य, भव्य और रचनात्मक” होगा। उन्होंने इसे केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की लोक परंपराओं, लोकज्ञान और लोककला को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच पर स्थापित करने का अभियान बताया।
शेखावत ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की संस्कृति उसकी जड़ों की तरह होती है और यदि ये जड़ें मजबूत हों तो समाज और राष्ट्र दोनों ध्वस्त होते हैं। उनके अनुसार लोकमंथन का उद्देश्य सांस्कृतिक जड़ों को नई ऊर्जा देना और समाज को भारत के सांस्कृतिक वैभव से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने राजनीति को राष्ट्र निर्माण का माध्यम बनाया है। उन्होंने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’, ‘लोकल के लिए वोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे आयामों को सांस्कृतिक आत्मविश्वास से जोड़ते हुए कहा कि भारत अपनी परंपराओं और बौद्धिक क्षमता के आधार पर वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, जे. नंदकुमार सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। इस दौरान लोकमंथन की वेबसाइट का लोकार्पण और ‘फोक से परे लोक’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

