अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपों का सामना कर रहे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर श्रीरामचरितमानस की चौपाई साझा करते हुए लिखा, “धीरज, धर्म, मित्र और नारी—आपद काल परखिए चारी”, और संकेत दिया कि संकट के समय ही व्यक्ति की वास्तविक परीक्षा होती है।
चंपत राय ने रामभक्तों के नाम हस्तलिखित पत्र जारी कर कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप “निराधार” हैं और उन्होंने अब तक इस मामले में मौन बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की बैठक में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की गई है, जबकि यह रिपोर्ट गोपनीय थी। उनका कहना है कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह सभी आरोपों और दुष्प्रचार का तथ्यात्मक जवाब देंगे।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि उन्हें वर्ष 1991 में संगठन ने अयोध्या भेजा था और उनका करीब 45 वर्षों का सार्वजनिक जीवन “खुली किताब” की तरह रहा है।
इस बीच, चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही SIT ने अब राम मंदिर ट्रस्ट के बड़े आयोजनों के खर्च की भी जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी 22 जनवरी 2024 के प्राण प्रतिष्ठा समारोह और 25 नवंबर 2025 के ध्वजारोहण कार्यक्रम से जुड़े बिलों और वाउचरों की पड़ताल कर रही है। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर करीब 113 करोड़ रुपये, जबकि ध्वजारोहण कार्यक्रम पर 10.12 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
उधर, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने कहा कि उनकी राय में चंपत राय का इस कथित चोरी से कोई प्रत्यक्ष या चारित्रिक संबंध नहीं है। हालांकि उन्होंने माना कि चंपत राय ने अपने ड्राइवर पर जरूरत से ज्यादा भरोसा किया और उसी के पास महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थीं। उन्होंने संकेत दिया कि ट्रस्ट में प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए अब मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जाएगा।
वहीं, ट्रस्ट के नए महासचिव कृष्ण मोहन ने मंगलवार को कार्यभार संभाल लिया।
दूसरी ओर, मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों करुणेश पांडेय, अनुकल्प मिश्र और लवकुश को अदालत ने एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर कथित चोरी के पूरे घटनाक्रम और संभावित नेटवर्क की जांच करेगी।
इधर, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने स्पष्ट किया है कि चंपत राय फिलहाल संगठन के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने रहेंगे। विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि आरोप सिद्ध होने से पहले किसी कार्रवाई का सवाल नहीं उठता।
इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि यदि मामले की जानकारी पहले से थी, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

