प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन ने भ्रष्टाचार और राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह घटना समाज में नैतिक मूल्यों के क्षरण का संकेत देती है। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में कानून को और सख्त बनाने की आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ हमीरपुर के एक बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति श्रीधरन ने कहा कि यदि धार्मिक स्थल पर चढ़ावे की कथित चोरी जैसी घटनाएं भी समाज को विचलित नहीं करतीं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सुझाव दिया कि भ्रष्टाचार के मामलों में कड़ी सजा के प्रावधान पर विचार किया जाना चाहिए।
जिस मामले की सुनवाई हो रही थी, उसमें याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि उनके एक रिश्तेदार के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले के बाद प्रशासन उनकी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने अदालत से अपनी संपत्ति की सुरक्षा की मांग की है। इस मामले में दोनों न्यायाधीशों की राय अलग होने के कारण इसे आगे की सुनवाई के लिए तीसरे न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है।
इस बीच, अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि जांच किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की निगरानी में निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से की जानी चाहिए तथा इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए। अदालत ने मामले के राजनीतिकरण से बचने की भी सलाह दी है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला जून में सामने आया था। आरोप है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी और आभूषणों की कथित हेराफेरी की गई। इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आठ लोगों को गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
जांच के दौरान विशेष जांच दल ने ट्रस्ट के एक पदाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। वहीं, ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मामले की जांच जारी है।

