प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत करते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में भागीदार बनने का आह्वान किया।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित कार्यक्रम में देशभर के 28 हजार से अधिक स्थानों से एक करोड़ से ज्यादा युवा जुड़े। प्रधानमंत्री ने युवाओं को भारत की “अमृत पीढ़ी” बताते हुए कहा कि आने वाले दो दशकों में वही देश की दिशा तय करेंगे और विकसित भारत के निर्माण में उनकी सबसे बड़ी भूमिका होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है, जब देश का युवा शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मविश्वासी और नशे जैसी आदतों से पूरी तरह मुक्त रहे। उन्होंने कहा कि नशा कुछ समय के लिए उत्साह देता है, लेकिन व्यक्ति के करियर, परिवार और भविष्य को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ड्रग्स की तस्करी केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत को कमजोर करने की दुश्मन देशों की साजिश का भी हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकार नशे के कारोबारियों और तस्करों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।
प्रधानमंत्री ने परिवारों से अपील की कि यदि कोई युवा नशे की गिरफ्त में आ जाए तो सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण उसे छिपाने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सहायता और पुनर्वास का सहारा लिया जाए। उन्होंने कहा कि परिवारों में संवाद का माहौल होना चाहिए ताकि बच्चे अपनी समस्याएं खुलकर साझा कर सकें और नशे की ओर बढ़ने से पहले उन्हें सहारा मिल सके।
उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के शिक्षकों से भी अपील की कि वे नियमित पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों के बीच नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा करें और परिसर में नशा मुक्ति अभियान चलाएं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नशे की लत छोड़ चुके युवाओं को समाज में दूसरा अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसे लोग कमजोर नहीं बल्कि कठिन परिस्थितियों से लड़कर बाहर निकलने वाले “असली योद्धा” हैं।
यह अभियान अगले 100 सप्ताह तक चलेगा। इसके तहत हर रविवार देशभर में खेल, कला, संस्कृति, योग, ध्यान, नुक्कड़ नाटक और जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य स्कूलों, कॉलेजों, सामाजिक संगठनों, उद्योग जगत और 125 से अधिक आध्यात्मिक संस्थाओं की भागीदारी से नशे के खिलाफ जन आंदोलन खड़ा करना है।

