जयपुर, 5 नवंबर 2026। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कांग्रेस द्वारा लोकतंत्र को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस का संवैधानिक संस्थानों पर लगातार प्रहार करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, जिन्हें वर्षों की मेहनत, कानूनों, संसद और भारत के 140 करोड़ देशवासियों के श्रम से सींचकर मजबूत बनाया गया है। कांग्रेस को इन संस्थानों पर प्रहार करने में न कोई शर्म है और न ही कोई झिझक है। जिस तरीके से कांग्रेस विभिन्न विषयों को उठा रही है, उससे लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा पर आंच आ रही है। इसलिए हमारी पार्टी और एनडीए ने तय किया है कि इस विषय को जनता के सामने ले जाया जाएगा और कांग्रेस के इस षड्यंत्र को समाप्त किया जाएगा।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र का सबसे मूल सिद्धांत एक सही मतदाता सूची है। इसी के आधार पर सभी चुनाव होते हैं, नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं आगे बढ़ती हैं। एसआईआर भारत के संविधान के अनुसार निर्धारित एक प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया आज पहली बार नहीं हो रही है, बल्कि 1947 के बाद से कई बार हो चुकी है। जब यह प्रक्रिया वर्षों से चली आ रही है, तो आज कांग्रेस को इस पर सवाल उठाने का क्या औचित्य है? उन्होंने कहा कि ईवीएम कांग्रेस की सरकार लेकर आई थीं। भारत की लोकतांत्रिक यात्रा में लोकतंत्र को मजबूत करने में ईवीएम की बहुत बड़ी भूमिका रही है। ईवीएम से पहले किस प्रकार चुनाव होते थे। ये किसी से छुपा हुआ नहीं है। जो वोट नहीं पड़ते थे,उन मतों को भी डालने के लिए पर्चियों पर ठप्पे लगा दिए जाते थे। पूरी-पूरी मतपेटियां भर दी जाती थीं और बूथ लूटने जैसी घटनाएं होती थीं। कांग्रेस और उसके सहयोगियों, विशेषकर कम्युनिस्टों के शासनकाल में इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आती थीं।ईवीएम आने के बाद ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिली। आज कांग्रेस किस आधार पर इस व्यवस्था पर सवाल उठा रही है?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस कहती है कि चुनाव बैलेट पेपर के आधार पर होने चाहिए। हमने बैलेट पेपर के आधार पर चुनाव कराकर भी देख लिया है। कांग्रेस की मांग पर एमएलसी के चुनाव बैलेट पेपर से कराए गए। इसके बावजूद यदि कांग्रेस सीटें नहीं जीत पाई, तो क्या वह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अपनी मांग वापस लेगी? उन्होंने कहा कि क्या कांग्रेस चाहती है कि भारत के नागरिक नहीं होने वाले लोगों को भी वोट देने का अधिकार मिले? क्या कांग्रेस चाहती है कि जिन लोगों का निधन हो चुका है, उनके नाम भी मतदाता सूची में बने रहें? क्या कांग्रेस चाहती है कि एक ही व्यक्ति का एक से अधिक जगह मतदाता सूची में नाम दर्ज हो? क्या कांग्रेस ऐसी व्यवस्था का समर्थन करती है? वैष्णव ने कहा कि जिस संविधान की किताब को लेकर कांग्रेस के नेता हर जगह दिखाई देते हैं, क्या उन्होंने उस किताब को पढ़ा भी है? क्या उन्हें पता है कि संविधान की व्यवस्था के अनुसार संसद का संचालन होना चाहिए? संविधान के तहत गठित संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए और संविधान के अनुसार निर्धारित प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाना तथा मजबूत करना चाहिए। मैं कांग्रेस के नेताओं से पूछना चाहता हूं कि क्या वे वास्तव में संविधान में विश्वास करते हैं?
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि समाज, देश और राजनीति से जुड़े जो भी विषय सामने आए हैं, उन सभी पर चर्चा के लिए हमने संसद का मंच उपलब्ध कराया है। संसद देश की सबसे बड़ी पंचायत है और संविधान द्वारा स्थापित एक महत्वपूर्ण संस्था है। क्या कांग्रेस इस संस्था में प्रत्येक विषय पर चर्चा करने के लिए तैयार है? यदि कांग्रेस तैयार है, तो आज अपनी मांग रखे। विशेष सत्र बुलाने से भी हम पीछे नहीं हटेंगे। कांग्रेस को एसआईआर पर चर्चा करनी है, तो वे संसद में आए और चर्चा करें। कांग्रेस ने पहले भी विभिन्न विषयों पर चर्चा की मांग की है। जिस भी विषय पर कांग्रेस ने चर्चा की मांग रखी, हमने उस पर चर्चा करवाई। लेकिन हर चर्चा के दौरान कांग्रेस के नेता बीच में ही सदन छोड़कर चले गए। एसआईआर पर चर्चा में भी ऐसा ही होगा। वैष्णव ने दावा किया कि कांग्रेस एसआईआर पर चर्चा के दौरान बीच में ही वॉकआउट करेगी, क्योंकि उसके पास न सच है और न ही कोई ठोस मुद्दा है।
रेल मंत्री अश्निवी वैष्णव ने कहा कि कांग्रेस केवल लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर आघात करना चाहती है। कांग्रेस का इतिहास ही इस तरह का रहा है, चाहे 1975 की इमरजेंसी हो, या कैबिनेट में स्वीकृत अध्यादेश को प्रेस क्लब में जाकर फाड़ना हो, या फिर संविधान की प्रदत्त कैबिनेट व्यवस्था से ऊपर अलग से राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (नेशनल एडवाइजरी काउंसिल) का गठन करना, इस प्रकार की व्यवस्थाएं कांग्रेस ने इसलिए बनाईं, क्योंकि उसे कभी संविधान में विश्वास ही नहीं रहा। कांग्रेस को केवल और केवल वोट बैंक की राजनीति में विश्वास रहा है। उन्होंने कहा कि अब वोट बैंक की राजनीति समाप्त हो चुकी है। आज देश की जनता विकास की राजनीति चाहती है। आज का भारत एक नए, समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत की कल्पना को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश के 140 करोड़ नागरिक एक साथ मिलकर इस लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। प्रेसवार्ता में मंच पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी, मुख्य प्रवक्ता रामलाल शर्मा और मीडिया प्रभारी प्रमोद वशिष्ठ उपस्थित रहे।
रेल मंत्री वैष्णव ने कांग्रेस पर दागे छह सवाल:—
- कांग्रेस राज से ही होता रहा है एसआईआर, अब सवाल उठाने का क्या है औचित्य?
- कांग्रेस स्वयं लाई ईवीएम, अब क्यों उठा रही है सवाल ?
- बैलेट पेपर की मांग करने वाली कांग्रेस क्या परिणाम स्वीकार करेगी?
- क्या कांग्रेस गैर-नागरिकों और दोहरे-तीहरे नामों को मतदाता सूची में बनाए रखना चाहती है?
- क्या कांग्रेस वास्तव में संविधान में विश्वास करती है?
- क्या कांग्रेस संसद में सभी विषयों पर चर्चा करने के लिए तैयार है?

