जोधपुर में सिजेरियन के बाद 8 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी,जांच शुरू;सरकार बोली- कोटा और बीकानेर से अलग मामला

Jodhpur Rajasthan

राजस्थान में कोटा और बीकानेर के बाद अब जोधपुर के पावटा स्थित जिला अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद आठ प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया है। इनमें ब्लीडिंग और ब्लड प्रेशर कम होने की शिकायत के बाद दो महिलाओं को गंभीर हालत में मथुरादास माथुर अस्पताल और फिर एम्स जोधपुर रेफर किया गया, जहां उनका आईसीयू में इलाज चल रहा है।

अस्पताल प्रशासन ने एहतियातन ऑपरेशन थिएटर को बंद कर दिया है और वहां से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने तक सर्जरी पर रोक लगा दी गई है। साथ ही सिजेरियन के दौरान इस्तेमाल की गई कुछ दवाओं को भी फिलहाल रोक दिया गया है।

जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. कुलबीर चोपड़ा ने बताया कि 20 जून को आठ सिजेरियन हुए थे, जिनमें से दो मरीजों की हालत ज्यादा बिगड़ी थी। बाकी छह प्रसूताओं की हालत अब स्थिर और सामान्य बताई जा रही है।

चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि जोधपुर के इस मामले को कोटा और बीकानेर की घटनाओं से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में अक्सर जटिल और रेफर किए गए गंभीर केस आते हैं, जबकि सामान्य मामलों की संख्या कम होती है।

सरकार का कहना है कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में प्रसव की सफलता दर 99.99 प्रतिशत है और पूरे मामले की चिकित्सकीय व प्रशासनिक जांच कराई जा रही है। मंत्री ने कहा कि शुरुआती जांच में लापरवाही के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन यदि किसी स्तर पर गलती सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी।

इस बीच, ड्रग विभाग ने अल्बर्ट डेविड लिमिटेड के सोडियम लैक्टेट इंजेक्शन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। इससे पहले कोटा और बीकानेर में भी सिजेरियन के बाद किडनी फेल होने के मामलों में कई महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिसके बाद राज्य में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।