“ना मैं दबाव में आता हूं,ना किसी पर दबाव डालता हूं”:-उपराष्ट्रपति धनखड़ का बयान

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राजस्थान में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक वातावरण और संवैधानिक पदों पर हो रहे बयानों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है और ना ही मैं किसी पर दबाव डालता हूं। ना मैं दबाव में आता हूं।”

धनखड़ राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े के बयान का हवाला दे रहे थे, जिन्होंने कहा था कि अगर राज्य में केंद्र से अलग पार्टी की सरकार हो, तो राज्यपाल को “आसान निशाना” बना लिया जाता है।

इस पर उपराष्ट्रपति ने कहा, “राज्यपाल की स्थिति आसान ‘पंचिंग बैग’ बना दी गई है, और अब इस दायरे में उपराष्ट्रपति और यहां तक कि राष्ट्रपति को भी शामिल किया जा रहा है। यह न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि गहन चिंतन का विषय भी है। ऐसा नहीं होना चाहिए।”

धनखड़ ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का भी उल्लेख किया और कहा कि वह भी किसी दबाव में आने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैंने उनके साथ काम किया है, और मैं जानता हूं कि वे किसी भी तरह के दबाव में नहीं आते।”

“राजनीतिक गर्मी लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं”

राजनीति में बढ़ती तल्खी और बयानों की तीव्रता पर टिप्पणी करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “आज राजनीति का तापमान और माहौल हमारे लोकतंत्र और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं है। यह हमारी हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति के भी खिलाफ है।”

उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में विचारधारा का फर्क स्वाभाविक है, “राजनीति में सत्ता बदलती रहती है, पक्ष-विपक्ष का आना-जाना होता रहता है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि हम एक-दूसरे को दुश्मन मान लें। हमारे दुश्मन सीमाओं के पार हो सकते हैं, देश के भीतर नहीं।”

धनखड़ ने नेताओं से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि “बेलगाम बयानबाज़ी से बचना चाहिए, क्योंकि इससे केवल देश का नुकसान होता है।”

उपराष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में लोकसभा चुनावों के बाद नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज है और कई संवैधानिक पदों को लेकर बहस भी जारी है।