राजस्थान सरकार ने गुर्जर सहित अन्य अति पिछड़ा वर्ग (एमबीसी) समुदाय की मांगों पर विचार और समाधान सुझाने के लिए तीन मंत्रियों की एक कैबिनेट सब-कमेटी गठित की है। इस समिति में कानून मंत्री जोगाराम पटेल, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म को शामिल किया गया है।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म स्वयं गुर्जर समुदाय से आते हैं और पूर्व में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की अगुआई में हुए आरक्षण आंदोलनों में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।
8 जून को बनी थी सहमति, अब समाधान की बारी
भरतपुर के बयाना क्षेत्र के पीलूपुरा स्थित कारवारी शहीद स्मारक पर 8 जून को हुई महापंचायत में गुर्जर समाज की कई मांगों पर सरकार के साथ प्रारंभिक सहमति बनी थी। सरकार की ओर से दिए गए मसौदे को गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला ने महापंचायत में पढ़कर सुनाया, जिसे समाज की स्वीकृति के बाद स्वीकार कर लिया गया।
हालांकि, इसी महापंचायत में एक अन्य धड़े ने सरकार के प्रस्ताव का विरोध किया और रेलवे ट्रैक को जाम कर दिया था।
बेढ़म ने दिया था बयान, कहा – लोकतंत्र में संवाद जरूरी
गृह राज्य मंत्री बेढ़म ने 8 जून को महापंचायत के दौरान कहा था कि “कुछ लोग किसी भी हालत में सरकार के विरोध में ही रहना चाहते हैं। जबकि सरकार बिना किसी दबाव के संवाद के लिए तैयार है, ऐसे में आंदोलन की क्या जरूरत है?”
ये थीं प्रमुख मांगें, जिन पर बनी थी सहमति
महापंचायत के दौरान सरकार की ओर से जिन मांगों को लेकर सहमति बनी, उनमें शामिल हैं:
- एमबीसी आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए कैबिनेट प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
- देवनारायण योजना और अन्य कल्याणकारी योजनाओं की मासिक समीक्षा की जाएगी, जिसमें संघर्ष समिति के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।
- अनुकंपा नियुक्ति, यानी आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों को नौकरी देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
- 2018 की रीट भर्ती में शेष बचे 372 पदों पर जल्द नियुक्ति की जाएगी।
- आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सरकार अब गठित कमेटी के माध्यम से इन मांगों के स्थायी समाधान की दिशा में कार्य करेगी। यह समिति इन मामलों पर गहराई से विचार कर रिपोर्ट पेश करेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

