“कण-कण में राम” सिर्फ दृश्य उत्कृष्टता नहीं,रामायण में निहित सार्वभौमिक मूल्यों का सांस्कृतिक संग्रह भी है:-केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत;संस्कृति और पर्यटन मंत्री ने इंटैक की डॉक्यूमेंट्री फिल्म का किया लोकार्पण

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नई दिल्ली, 23 जुलाई 2025 –
भारतीय कला और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए समर्पित संस्था INTACH (Indian National Trust for Art and Cultural Heritage) ने अपनी डॉक्यूमेंट्री ‘कण-कण में राम’ का विशेष स्क्रीनिंग कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन नई दिल्ली स्थित INTACH के मल्टीपर्पस हॉल में हुआ, जिसमें केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने INTACH के शोध और रचनात्मक प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि ‘कण-कण में राम’ सिर्फ एक दृश्यात्मक उत्कृष्ट कृति नहीं है, बल्कि यह रामायण में निहित सार्वभौमिक सांस्कृतिक मूल्यों का एक सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यह डॉक्यूमेंट्री रामायण को केवल एक पौराणिक कथा नहीं, बल्कि भारतीय पहचान से गहराई से जुड़ी जीवंत परंपरा के रूप में प्रस्तुत करती है।

शेखावत ने INTACH की चार दशक पुरानी सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण की यात्रा की भी सराहना की और अपने जल शक्ति मंत्रालय के अनुभव का उल्लेख करते हुए, गंगा सांस्कृतिक प्रलेखन परियोजना में संस्था की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया।

कार्यक्रम में INTACH के चेयरमैन श्री अशोक सिंह ठाकुर और सदस्य सचिव श्री रवींद्र सिंह (सेवानिवृत्त IAS) समेत कई वरिष्ठ अधिकारी, विद्वान एवं आमंत्रित अतिथि भी मौजूद रहे। श्री ठाकुर ने बताया कि संस्था का कार्यक्षेत्र मूर्त, अमूर्त और प्राकृतिक धरोहर से लेकर स्कूली शिक्षा, हस्तशिल्प और प्रकाशन तक फैला है।

डॉक्यूमेंट्री की विशेषताएं:
यह फिल्म भारत के विभिन्न राज्यों में रामायण की प्रस्तुतियों को दर्शाती है – जैसे कर्नाटक का यक्षगान और उप्पिनीकुद्रु कठपुतली, ओडिशा की लंका पोड़ी यात्रा और रावण छाया, असम की सत्त्रिया परंपरा, राजस्थान का मेवाती भपंग प्रदर्शन और छत्तीसगढ़ के रामनामी समाज की विशेष श्रद्धा।

फिल्म का सार:
‘कण-कण में राम’ का केंद्रीय भाव है कि प्रभु श्रीराम की उपस्थिति धर्म की सीमाओं से परे है – वह हर कण में समाए हैं, और उनका संदेश मानवता के लिए सार्वकालिक है। डॉक्यूमेंट्री भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं और लोक कलाओं के माध्यम से इस विचार को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।

यह फिल्म INTACH की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता का एक और प्रमाण है।