महाराष्ट्र के मालेगांव में 2008 में हुए विस्फोट मामले में एनआईए की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया है। इनमें भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल प्रसाद पुरोहित, रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, समीर कुलकर्णी और सुधाकर धर द्विवेदी शामिल हैं।
कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) आरोपों को साबित करने में असफल रही, इसलिए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ दिया जाता है। फैसले में विशेष जज एके लाहोटी ने यह भी कहा कि यह साबित नहीं हो सका कि बम मोटरसाइकिल में रखा गया था या वह मोटरसाइकिल साध्वी प्रज्ञा के नाम पर थी। कर्नल पुरोहित के बम बनाने का आरोप भी साबित नहीं हुआ।
29 सितंबर 2008 को मालेगांव में हुए धमाके में छह लोगों की मौत हुई थी और करीब 100 लोग घायल हुए थे। इस मामले में पहले महाराष्ट्र ATS ने जांच की, लेकिन 2011 में यह केस एनआईए को सौंप दिया गया। 2016 में एनआईए ने चार्जशीट दाखिल की थी। केस के दौरान तीन जांच एजेंसियां और चार जज बदले गए।
पीड़ितों की ओर से वकील शाहिद नवीन अंसारी ने कोर्ट के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि वे इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों और सरकार दोनों ने इस मामले को कमजोर किया है।

