भारत के हिस्सों को ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के नक्शे में दिखाने पर संसद में हंगामा,विदेश मंत्री ने कहा– पूरी नजर रखी जा रही है

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बांग्लादेश में हाल ही में सामने आए विवादित नक्शे को लेकर भारत की संसद में बृहस्पतिवार को जोरदार चर्चा हुई। इस नक्शे में भारत के सात राज्यों – पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा, बिहार, झारखंड और ओडिशा – के कुछ हिस्सों को कथित तौर पर ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का हिस्सा दिखाया गया है।

राज्यसभा में कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यह मुद्दा उठाते हुए सरकार से सवाल किया कि इस पर भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया क्या है और क्या बांग्लादेश में तुर्की और पाकिस्तान समर्थित कट्टरपंथी संगठनों की गतिविधियों पर सरकार की नजर है?

विदेश मंत्री का जवाब:

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने लिखित जवाब में कहा कि भारत सरकार इस मामले पर पूरी तरह सतर्क है और इस तरह के किसी भी प्रोपेगेंडा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर डालने वाली गतिविधियों पर कड़ी नजर बनाए हुए है।

जयशंकर ने चार बिंदुओं में सरकार की स्थिति स्पष्ट की:

  1. भारत सरकार को बांग्लादेश में ‘सल्तनत-ए-बांग्ला’ नाम के एक इस्लामी ग्रुप द्वारा प्रदर्शित ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के नक्शे की जानकारी है।
  2. बांग्लादेश सरकार के फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म ‘बांग्लाफैक्ट’ ने कहा है कि इस ग्रुप की मौजूदगी के पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।
  3. यह नक्शा कथित रूप से एक ऐतिहासिक प्रदर्शनी में पुराने बंगाल सल्तनत के संदर्भ में लगाया गया था।
  4. भारत अपनी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाता रहा है और भविष्य में भी उठाएगा।

क्या है विवाद का मूल?

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, यह विवाद 14 अप्रैल 2025 को ढाका यूनिवर्सिटी में आयोजित एक प्रदर्शनी से जुड़ा है। वहां लगाए गए एक नक्शे में भारत के कुछ हिस्सों को बांग्लादेश में दिखाया गया। आरोप है कि यह नक्शा तुर्की समर्थित कट्टरपंथी समूह ‘सल्तनत-ए-बांग्ला’ ने तैयार किया। रिपोर्टों के अनुसार, इस समूह को तुर्की के ‘तुर्की यूथ फेडरेशन’ नामक NGO का समर्थन है।

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद तुर्की और बांग्लादेश के रिश्तों में नजदीकी बढ़ी है और सेना के सहयोग से लेकर सामाजिक संगठनों की सक्रियता में भी वृद्धि देखी गई है।

पहले भी सामने आया था नक्शा विवाद

यह पहला मौका नहीं है जब ऐसा नक्शा सामने आया हो। दिसंबर 2024 में अंतरिम सरकार के सलाहकार महफूज आलम ने एक नक्शा पोस्ट किया था जिसमें भारत के बंगाल, असम और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों को बांग्लादेश में दिखाया गया था। बाद में विवाद बढ़ने पर वह पोस्ट हटा दी गई थी।

बांग्लादेश के सामानों पर भारत के नए प्रतिबंध

इस विवाद के बीच भारत ने बांग्लादेश से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। भारत के वाणिज्य मंत्रालय के तहत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने 17 मई को इसकी घोषणा की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भारत के घरेलू कपड़ा उद्योग को फायदा होगा, लेकिन बांग्लादेश की पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।


पृष्ठभूमि:
गौरतलब है कि 2024 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का सैन्य तख्तापलट हुआ था और अंतरिम सरकार सत्ता में आई थी। उसी के बाद से कट्टरपंथी गुटों की सक्रियता और विदेश नीति में बदलाव के संकेत मिले हैं।

BBC हिंदी की रिपोर्टों के अनुसार, भारत सरकार किसी भी नक्शा विवाद या सुरक्षा खतरे को हल्के में नहीं ले रही और हर गतिविधि पर सतर्क नजर बनाए हुए है।