जयपुर — राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव को लेकर सियासत तेज़ हो गई है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि “कई बार जो गलती पहले वाले कर देते हैं, वही हम भी दोहरा देते हैं, जबकि गलती दोहराई नहीं जानी चाहिए। गहलोत साहब भी कहते हैं कि हर गलती की सज़ा लंबी पूरी होती है और इतिहास उसे माफ़ नहीं करता।”
जयपुर में मीडिया से बातचीत में मंत्री मीणा ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव करवाने या न करवाने का निर्णय मुख्यमंत्री के स्तर पर होता है, और वे इस पर टिप्पणी करने के अधिकृत नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे खुद छात्र राजनीति से जुड़े नहीं रहे, लेकिन कई नेता ऐसे हैं जो इसी से उभरकर एमएलए, एमपी और मंत्री बने हैं।
मीणा ने इशारों में मौजूदा सरकार के छात्रसंघ चुनाव न कराने के फ़ैसले पर सवाल उठाए और इसे पिछली सरकार की “गलती” दोहराने जैसा बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जो लोग अपने कार्यकाल में चुनाव बंद कर गए, आज वही इस पर बात कर रहे हैं।”
राज्य सरकार ने 13 अगस्त को हाईकोर्ट में हलफ़नामा दाखिल करते हुए छात्रसंघ चुनाव न कराने का फ़ैसला किया था। सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने, लिंगदोह समिति की सिफ़ारिशों और विश्वविद्यालयों के कुलगुरुओं की राय का हवाला दिया।
कई कुलगुरुओं ने अपनी सिफारिशों में कहा कि चुनावी माहौल से पढ़ाई बाधित होती है, परीक्षा परिणाम में देरी होती है और शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित होता है। कुछ ने यह भी कहा कि पिछली बार चुनाव के बाद तोड़फोड़, पोस्टरबाज़ी और गंदगी साफ करने में महीनों लग गए थे।
छात्रसंघ चुनाव पर कृषि मंत्री किरोड़ी का बयान — ‘गलती दोहराना ठीक नहीं, फैसला उच्च स्तर का’फिलहाल, छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा राजनीति और शिक्षा जगत दोनों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

