बेंगलुरु, 11 सितंबर। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा है कि संसद और विधानसभाओं में सार्थक संवाद और स्वस्थ बहस लोकतंत्र को मजबूती देते हैं और जनता के विश्वास को बढ़ाते हैं। वे गुरुवार को बेंगलुरु स्थित विधान सौध की ऐतिहासिक सीढ़ियों पर आयोजित 11वें कॉमनवेल्थ संसदीय संघ (सीपीए) इंडिया रीजन सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे थे।
तीन दिवसीय सम्मेलन का विषय है— “विधानसभाओं में बहस और चर्चा: जनता का विश्वास बनाना, जनता की आकांक्षाएं पूरी करना”।
अपने संबोधन में ओम बिड़ला ने कहा कि भारत में संवाद की परंपरा हजारों वर्षों से लोकतांत्रिक संस्कृति का हिस्सा रही है और संविधान ने इसे और मजबूती दी। उन्होंने संविधान सभा की बहसों का उल्लेख करते हुए कहा कि हर अनुच्छेद और प्रावधान पर गहन चर्चा ने संविधान को दूरदर्शी और समावेशी बनाया।
उन्होंने कहा, “विचारों का मतभेद स्वाभाविक है, लेकिन गतिरोध और व्यवधान लोकतंत्र को आहत करते हैं। जनता समाधान चाहती है, शोरगुल नहीं।”
लोकसभा अध्यक्ष ने घटती बैठकों की संख्या और सीमित बहस पर चिंता जताते हुए कहा कि अधिक सत्र और लंबी चर्चाएं जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि सार्थक बहस से बेहतर कानून बनते हैं, बेहतर कानून सुशासन सुनिश्चित करते हैं और सुशासन जनता का विश्वास मजबूत करता है।
ओम बिड़ला ने तकनीक और नवाचार की भूमिका पर भी प्रकाश डाला और बताया कि डिजिटल पार्लियामेंट ऐप और नेवा (नेशनल ई-विदान एप्लिकेशन) जैसे कदमों ने संसद और विधानसभाओं की प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ बनाया है। अब कार्यवाही हिंदी और अंग्रेज़ी के अलावा 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।
इस अवसर पर कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष ने स्वागत भाषण दिया, जबकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, विधान परिषद के अध्यक्ष, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
कॉमनवेल्थ संसदीय संघ (सीपीए) एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसमें करीब 180 संसदीय संस्थान और विधानसभाएं शामिल हैं। ओम बिड़ला सीपीए इंडिया रीजन कार्यकारी समिति के पदेन अध्यक्ष हैं।

