अलवर, 4 नवम्बर — राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में गरीबों के नाम मतदाता सूचियों से हटाने का षड्यंत्र कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार निकाय और पंचायत चुनावों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह प्रक्रिया जल्दबाजी में शुरू कर रही है।
अलवर के मोती डूंगरी कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में जूली ने कहा कि प्रदेश में 4 नवम्बर से एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि विधानसभा चुनाव अभी तीन साल दूर हैं। “राजस्थान सरकार चाहती तो दूसरे चरण में एसआईआर करा सकती थी, लेकिन वह चुनावी प्रक्रिया को टालने और भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है,” उन्होंने कहा।
जूली ने आरोप लगाया कि सरकार के पास एसआईआर के लिए कोई ठोस तैयारी नहीं है। बीएलओ और बीएलए की मीटिंग अचानक बुलाई जा रही हैं और लोगों की शादी-ब्याह जैसी व्यस्तताओं को ध्यान में नहीं रखा जा रहा। “यह सब केवल निकाय और पंचायत चुनावों को छह महीने और टालने की साजिश है,” उन्होंने कहा।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी दावा किया कि “राजस्थान में एसआईआर की आड़ में गरीब तबके के मतदाताओं के नाम सूची से हटाने की तैयारी चल रही है।” उन्होंने कहा कि देश में अभी एसआईआर का पहला चरण 12 राज्यों में चल रहा है और दूसरा चरण आगे होगा, इसलिए राजस्थान में इतनी जल्दबाजी की कोई जरूरत नहीं थी।
जूली ने मांग की कि सरकार पारदर्शिता बरते और यह सुनिश्चित करे कि एसआईआर प्रक्रिया का दुरुपयोग किसी भी वर्ग या समुदाय के अधिकारों को प्रभावित करने के लिए न हो।

