वंदे मातरम् के 150 वर्ष: ‘भारत की सामूहिक कंठध्वनि का जन उत्सव’, श्रीनगर में बोले केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत – “कश्मीर अब नए भारत की पहचान बन रहा है”

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नई दिल्ली/श्रीनगर/जोधपुर, 6 नवंबर — केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होना भारत की “विविधता में एकता” की भावना का प्रतीक है और यह देश की सामूहिक कंठध्वनि का स्वस्फूर्त जन उत्सव है।

शेखावत ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए लिखा कि “श्रीनगर में ‘विकास भी–विरासत भी’ की नई बयार को महसूस करते हुए मुझे यह अहसास हुआ कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि हर भारतीय की आत्मा की आवाज है।” उन्होंने कहा कि वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत आज़ादी के आंदोलन की आत्मा रहा है और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसे “विकसित भारत निर्माण” के जनआंदोलन का स्वर बनाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में वंदे मातरम् के 150 वर्षों को समर्पित वर्षभर के राष्ट्रव्यापी समारोह का शुभारंभ करेंगे, जो इस गीत को स्वतंत्रता के अमृतकाल में नई ऊर्जा देने का प्रतीक होगा।

इसी दौरान श्रीनगर के केआईसीसी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बोलते हुए शेखावत ने कहा कि “कश्मीर की प्रगति अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि धरातल पर दिख रही है।” उन्होंने कहा कि “सम्मान, समान अवसर और आत्मगौरव से भरे भविष्य की राह पर बढ़ता कश्मीर अब ‘नए भारत’ की पहचान बन रहा है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि घाटी की छवि अब हिंसा नहीं, बल्कि पर्यटन और विकास से जुड़ रही है। उन्होंने बताया कि भारत की जीडीपी में पर्यटन क्षेत्र का योगदान 5.6% है, जिसे वर्ष 2047 तक 10% तक पहुंचाने का लक्ष्य है। “अगर आने वाले 20 वर्षों में पर्यटन की वृद्धि दर 20 प्रतिशत तक पहुंची, तो इसका सबसे बड़ा लाभ कश्मीर के लोगों को मिलेगा,” उन्होंने कहा।

शेखावत ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें विश्व बैंक के साथ मिलकर कश्मीर में नए पर्यटन स्थलों के विकास पर काम कर रही हैं, जिससे क्षेत्र में नए रोजगार और अवसर सृजित होंगे। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे कश्मीर को “सस्टेनेबल और विकेन्द्रीकृत पर्यटन” के मॉडल के रूप में विकसित करने में योगदान दें।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अभूतपूर्व प्रगति की है — “25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं और आने वाले वर्षों में भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने से कोई नहीं रोक सकता।”

उन्होंने कहा कि जब कोई देश आगे बढ़ता है तो उसमें युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भूमिका सबसे अहम होती है। “मुझे विश्वास है कि भारत का युवा इस परिवर्तन का वाहक बनेगा और विश्व मंच पर देश की पहचान को और मजबूत करेगा,” उन्होंने कहा।