लोकसभा में सोमवार को राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने पर विशेष चर्चा हुई, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। करीब एक घंटे के भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ अंग्रेजों के खिलाफ एक सशक्त जवाब था और आज भी देश को प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भी इस गीत को अत्यधिक महत्व देते थे और इसे राष्ट्रगान के रूप में देखते थे।
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि पिछले दशकों में इस गीत के साथ ‘अन्याय’ किया गया और इसकी पृष्ठभूमि पर सवाल खड़े किए गए। मोदी ने अपने भाषण में वंदे मातरम् का 121 बार उल्लेख किया और नेहरू, गांधी, मुस्लिम लीग और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय सहित कई ऐतिहासिक संदर्भ दिए।
मोदी ने दावा किया कि 1936 में जिन्ना के विरोध के बाद कांग्रेस ने दबाव में आकर ‘वंदे मातरम्’ के उपयोग को सीमित किया। उन्होंने कहा कि “नेहरू मुस्लिम लीग के आधारहीन आरोपों का जवाब देने के बजाय खुद वंदे मातरम् की पड़ताल में लग गए।” पीएम ने कहा कि कांग्रेस ने उस समय गीत के अंशों को हटाने का निर्णय लेकर तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ाया।
पीएम मोदी ने 1906 के बारीसाल जुलूस का भी उल्लेख किया, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग ‘वंदे मातरम्’ के झंडे लेकर सड़कों पर उतरे थे। उन्होंने कहा कि बंगाल के स्वतंत्रता आंदोलन में यह नारा एकता और साहस का प्रतीक बन गया था।
संसद में इस चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय किया गया है। सरकार के अनुसार चर्चा का उद्देश्य वंदे मातरम् के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व को उजागर करना है। यह भी माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव से पहले इस विषय को उठाना राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम है।
विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरुआत कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने की। सरकार 8 दिसंबर को लोकसभा और 9 दिसंबर को राज्यसभा में इस विषय पर विस्तृत विचार-विमर्श कर रही है, जिसके ज़रिए वर्षभर चलने वाली 150वीं वर्षगांठ से जुड़ी गतिविधियों का आगाज़ किया जा रहा है।

