अलवर:अरावली को लेकर कांग्रेस का तीखा हमला ‘काला कानून’ वापस लेने की मांग

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अलवर में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर कांग्रेस नेताओं ने राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि अरावली क्षेत्र से जुड़ा कोई भी ऐसा कानून, जो जनहित के खिलाफ है, उसे वापस लेने के लिए कांग्रेस हर स्तर पर संघर्ष करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला किसानों के खिलाफ लाए गए कानूनों जैसा ही है और सरकार को जनदबाव के आगे झुकना पड़ेगा।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि अरावली प्राकृतिक रूप से आंधियों और पर्यावरणीय संकटों को रोकने का काम करती है। यदि इसे नुकसान पहुंचाया गया तो स्थिति भयावह हो सकती है। उन्होंने खनन माफिया को बढ़ावा देने के आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और सामाजिक संस्थाओं तथा आम नागरिकों को इस आंदोलन से जुड़ना होगा।

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि अरावली प्रदेश की “जीवन रेखा” है और इसे मुनाफे के लिए दांव पर नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के व्यावसायिक हितों के कारण आम जनता का जीवन खतरे में डाला जा रहा है। डोटासरा ने कहा कि पहले सीटीएच और अब अरावली के मुद्दे पर कांग्रेस और जनता ने विरोध का बिगुल फूंका है और यह आंदोलन आगे और तेज होगा।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अरावली बचाओ पैदल मार्च के दौरान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अरावली के संकट का असर दूरगामी होगा और इससे हिमालय तक पर खतरा मंडरा सकता है। जूली ने दावा किया कि खनन माफिया के खिलाफ की गई शिकायतों पर अब तक कोई ठोस जांच नहीं हुई है, जो सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है।

इसी दौरान कांग्रेस नेताओं ने राजगढ़-अलवर मेगा हाईवे स्थित कांदोली बाईपास पर केंद्रीय विद्यालय की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन का भी समर्थन किया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह सहित कई नेताओं ने धरनास्थल पर पहुंचकर सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया। नेताओं ने कहा कि यदि सरकार के पास जमीन की कमी है तो उसे अधिग्रहित किया जाए और क्षेत्र की शैक्षणिक जरूरतों को प्राथमिकता दी जाए।