शिक्षापत्री द्विशताब्दी महोत्सव:पीएम मोदी ने ज्ञानयोग,सेवा और प्राचीन ज्ञान पर ज़ोर दिया

Front-Page National

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को वीडियो संदेश के ज़रिये शिक्षापत्री द्विशताब्दी महोत्सव को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा हज़ारों वर्षों से ज्ञानयोग के मार्ग पर चलती रही है और वेद आज भी मानवता को प्रेरणा देते हैं। प्रधानमंत्री ने इस अवसर को भगवान स्वामीनारायण की शिक्षापत्री के 200 वर्ष पूरे होने का “सौभाग्यपूर्ण क्षण” बताया और उनके करोड़ों अनुयायियों को शुभकामनाएं दीं।

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा वेदों से उपनिषदों, पुराणों और श्रुति-स्मृति की परंपरा के माध्यम से आगे बढ़ती रही है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग कालखंडों में संतों और महापुरुषों ने समय की ज़रूरतों के अनुसार इस परंपरा को नई दिशा दी। प्रधानमंत्री के मुताबिक, भगवान स्वामीनारायण का जीवन लोकशिक्षा और जनसेवा से गहराई से जुड़ा रहा और शिक्षापत्री के माध्यम से उन्होंने सरल शब्दों में जीवन के लिए अमूल्य मार्गदर्शन दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि द्विशताब्दी समारोह आत्ममंथन का अवसर है—कि शिक्षापत्री से आज क्या सीखा जा रहा है और उसके आदर्शों को रोज़मर्रा के जीवन में कैसे अपनाया जा रहा है। उन्होंने भगवान स्वामीनारायण को आध्यात्मिक साधना और सेवा—दोनों का प्रतीक बताया और कहा कि उनके अनुयायी आज शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान कल्याण और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने स्वदेशी, स्वच्छता और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे जनआंदोलनों का ज़िक्र करते हुए कहा कि यदि ऐसे प्रयासों को धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों से जोड़ा जाए, तो उनका प्रभाव और बढ़ जाता है। उन्होंने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए शुरू किए गए ‘ज्ञान भारतम मिशन’ में सभी संगठनों से सहयोग की अपील की और कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा और पहचान को सुरक्षित रखना बेहद ज़रूरी है।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का भी उल्लेख किया और इसे भारत की सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीक बताया। उन्होंने विश्वास जताया कि भगवान स्वामीनारायण के अनुयायियों के प्रयासों से भारत की विकास यात्रा को निरंतर प्रेरणा और आशीर्वाद मिलता रहेगा।