भ्रष्टाचार आधारित बिना योजना के बनते थे प्रोजेक्ट,हमारी सरकार ने अंत्योदय के भाव से स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत कीं: चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर

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जयपुर, 25 मार्च। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा है कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के कुशल नेतृत्व एवं दूरदर्शी विजन से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं निरंतर सुदृढ़ हो रही हैं। विगत दो वर्ष में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए बजट, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन तीनों में बड़ी वृद्धि हुई है। कई मामलों में यह वृद्धि पूर्ववर्ती सरकार के पांच वर्ष से काफी अधिक है। पिछली सरकार में भ्रष्टाचार संस्थागत हो चुका था और उसी को केंद्र में रखकर चहेते लोगों या एजेंसियों को लाभ पहुंचाने की मंशा से प्रोजेक्ट बनाए जाते थे। हमारी सरकार का मूलमंत्र अंत्योदय और विकसित राजस्थान है। उसी भावना के साथ दो वर्ष में स्वास्थ्य सेवाओं को उन्नत किया गया है।

खींवसर ने कहा है कि पिछली सरकार के शुरूआती चार वर्षों में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। चुनावी साल में आनन—फानन में बिना प्लानिंग एवं बिना समुचित बजट प्रावधान के घोषणाएं कर जल्दबाजी में काम शुरू कर दिए गए। वर्तमान सरकार ने इन कामों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त बजट दिया और बेहतर प्लानिंग के साथ ये काम पूरे करवाए जा रहे हैं, ताकि रोगियों को क्वालिटी हेल्थ सर्विसेज मिले। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को वर्तमान सरकार का शुक्रिया अदा करना चाहिए कि उनके द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट बंद करने के बजाय बेहतर ढंग से पूरे किए जा रहे हैं।

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय वर्ष 2019-20 में स्वास्थ्य का बजट मात्र 13 हजार 542 करोड़, वर्ष 2020-21 में 13 हजार 395 करोड़, 2021-22 में 17 हजार 82 करोड़, 2022-23 में 20 हजार 127 करोड़ तथा 2023-24 में 22 हजार 572 करोड़ था, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2024-25 में यह बजट बढ़कर 27 हजार 713 करोड़, 2025-26 में 31 हजार 880 करोड़ तथा 2026-27 में 32 हजार 531 करोड़ रूपए हो गया। बजट में हो रही यह वृद्धि राज्य सरकार की स्वास्थ्य के क्षेत्र के संबंध में प्रतिबद्धता दर्शाती है।

चिकित्सा मंत्री ने कहा है कि पिछली सरकार ने सवाई मानसिंह अस्पताल में IPD टॉवर एवं कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज़ भवन का निर्माण कार्य बिना किसी प्लानिंग और बिना चिकित्सा विशेषज्ञों की राय के शुरू कर दिए। इतने बड़े संस्थानों के लिए न पार्किंग का प्रावधान किया न पर्याप्त बजट का। हमारी सरकार आने पर आईपीडी टॉवर के लिए पार्किंग निर्माण सहित अन्य जरूरी कार्यों के लिए प्रावधान किए गए और अतिरिक्त बजट आवंटन किया गया।

IPD टॉवर के निर्माण क्षेत्रफल में वृद्धि तथा कार्डियोलॉजी भवन के विस्तारीकरण (8273 वर्गमीटर से बढ़ाकर 12000 वर्गमीटर) के कारण अतिरिक्त लागत सामने आई। साथ ही IPD टॉवर में अतिरिक्त मंजिलों, सर्विस फ्लोर एवं अन्य संरचनात्मक परिवर्तनों के कारण परियोजना की लागत में वृद्धि हुई। IPD टॉवर में 20वीं मंजिल तक कोर का निर्माण किया जा चुका है। कार्डियोलॉजी भवन का सिविल वर्क पूरा हो चुका है। फिनिशिंग और चिकित्सा उपकरणों की स्थापना का कार्य भी समानांतर रूप से किया जा रहा है।

चिकित्सा मंत्री ने कहा कि महिला चिकित्सालय में बनाए जा रहे आईपीडी टॉवर का भी सिविल वर्क लगभग पूरा हो चुका है और उपकरणों की खरीद एवं स्थापना का कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा है कि इस टॉवर के निर्माण में भी चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह नहीं लेने के कारण कई अतिरिक्त कार्य शामिल किए गए हैं और उनके लिए अतिरिक्त बजट प्रावधान शामिल किए गए हैं।

चिकित्सा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016 तक प्रदेश में मात्र 8 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हर जिले में मेडिकल कॉलेज की नीति के कारण वर्ष 2016 के बाद 23 नए मेडिकल कॉलेज राजस्थान में स्थापित हुए। उन्होंने बताया कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में करीब 10 हजार 540 करोड़ की लागत से 186 नए चिकित्सा संस्थान बनाए जा रहे हैं। विगत दो वर्ष में अस्पतालों में 6400 बैड की वृद्धि हुई है।

पूर्ववर्ती सरकार के मुकाबले कई गुना बढ़े चिकित्सा संस्थान, मिशन मोड में हुई भर्तियां

पूर्ववर्ती सरकार के पहले दो साल में एक भी नई पीएचसी नहीं खोली गई, जबकि वर्तमान सरकार ने 6 नई पीएचसी स्थापित की। इसी प्रकार पूर्ववर्ती सरकार के दो साल में 53 सीएचसी, जबकि वर्तमान सरकार में 84, उप जिला अस्पताल 1 के मुकाबले 61, जिला अस्पताल 3 के मुकाबले 14, सेटेलाइट हॉस्पिटल 2 के मुकाबले 18 खोले गए। दो साल में 35 हजार से अधिक भर्तियां की गई हैं और 14 हजार से अधिक पदों पर भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं। इससे शहरों से लेकर ट्राइबल एवं सीमावर्ती सहित सभी क्षेत्रों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हुआ है। पूर्ववर्ती सरकार के पांच साल में मात्र 29 हजार पदों पर ही भर्तियां की गईं थी।
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