केंद्र सरकार ने श्रम संहिता के दायरे में आने वाले 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए राष्ट्रव्यापी वार्षिक स्वास्थ्य जांच अभियान शुरू किया है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने दिल्ली के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से इस पहल की शुरुआत की।
सरकार का कहना है कि इस अभियान के तहत श्रमिकों की हर साल मुफ्त स्वास्थ्य जांच की जाएगी, जिससे बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाकर इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा। जांच के दौरान पहचानी गई बीमारियों के इलाज और दवाइयों की सुविधा ईएसआईसी अस्पतालों के जरिए उपलब्ध कराई जाएगी।
डॉ. मांडविया ने कहा कि नई श्रम संहिताओं के जरिए सरकार श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा दायरा लगातार बढ़ा रही है। उनके मुताबिक, भारत उन शुरुआती देशों में शामिल हो गया है, जिसने गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा ढांचे में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
उन्होंने बताया कि देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज पिछले एक दशक में 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत तक पहुंच गया है और अब लगभग 94 करोड़ लोग इसका लाभ उठा रहे हैं। वहीं ईएसआईसी से जुड़े लाभार्थियों की संख्या भी करीब 7 करोड़ से बढ़कर 15 करोड़ हो गई है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने पुरुष और महिला श्रमिकों के लिए समान वेतन, मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने और महिलाओं के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसे प्रावधान भी लागू किए हैं।
इस पहल के तहत जयपुर सहित देशभर के 11 ईएसआईसी अस्पतालों में एक साथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। जयपुर के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। यहां 300 से अधिक श्रमिकों की डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, एनीमिया, ईसीजी और चेस्ट एक्स-रे जैसी जांचें की गईं।
सरकार का कहना है कि यह अभियान श्रमिकों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।

