गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन तेज,नौवें दिन भी धरने पर डटे रहे विधायक रविन्द्र सिंह भाटी

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बाड़मेर जिले की गिरल लिग्नाइट माइंस में चल रहा श्रमिकों और ग्रामीणों का आंदोलन अब बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। लगभग एक महीने पहले शुरू हुआ यह धरना अब केवल मजदूरों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह स्थानीय अधिकारों, श्रमिक सम्मान, पर्यावरण संरक्षण, कॉर्पोरेट जवाबदेही और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ व्यापक संघर्ष बन चुका है।

शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी लगातार नौवें दिन भी धरनास्थल पर डटे रहे। बीते नौ दिनों से विधायक भाटी ग्रामीणों, श्रमिकों और आंदोलनकारियों के साथ धरनास्थल पर ही रह रहे हैं तथा लगातार वहीं रात्रि विश्राम कर रहे हैं। उनकी लगातार मौजूदगी ने आंदोलन को राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नई मजबूती दी है।

आठवीं रात बिगड़ी विधायक भाटी की तबीयत, मौके पर बुलाना पड़ा डॉक्टर

धरने के आठवें दिन की रात लगातार थकावट, गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बीच धरनास्थल पर मौजूद शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जानकारी के अनुसार देर रात स्थानीय डॉक्टर को मौके पर बुलाया गया, जिसके बाद विधायक भाटी को प्राथमिक उपचार दिया गया तथा ड्रिप सपोर्ट भी देना पड़ा।

हालांकि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद विधायक भाटी ने धरनास्थल छोड़ने से इनकार कर दिया और अगले दिन भी आंदोलन में डटे रहे। उनके स्वास्थ्य बिगड़ने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक धरनास्थल पर पहुँचने लगे।

क्या है पूरा मामला?

गिरल लिग्नाइट माइंस में कार्यरत श्रमिकों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से कंपनी द्वारा स्थानीय लोगों के साथ अन्यायपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है। आंदोलनकारियों के अनुसार कंपनी ने 100 से अधिक स्थानीय ड्राइवरों और श्रमिकों को कार्य से हटा दिया, जिससे अनेक परिवारों के सामने रोज़गार का संकट खड़ा हो गया।

धरने पर बैठे श्रमिकों की प्रमुख मांगों में हटाए गए श्रमिकों और ड्राइवरों की पुनर्बहाली, श्रमिकों से 12 घंटे के बजाय केवल 8 घंटे कार्य करवाना, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देना, श्रमिकों को नियमानुसार वेतन एवं बोनस देना तथा बुनियादी श्रमिक सुविधाएँ सुनिश्चित करना शामिल है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा का दोहन किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों को उसका लाभ नहीं मिल रहा।

CSR और विकास कार्यों को लेकर भी उठे गंभीर सवाल

धरने के दौरान ग्रामीणों और आंदोलनकारियों ने कंपनी की CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) गतिविधियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने क्षेत्र में विकास और कल्याण के नाम पर बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन धरातल पर स्थानीय गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और रोजगार जैसे मुद्दों पर अपेक्षित कार्य नहीं हुआ, जबकि माइंस से लगातार भारी आर्थिक गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं।

पौधारोपण के नाम पर अनियमितताओं का आरोप

आंदोलन ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने मीडिया को साथ लेकर माइंस क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विधायक भाटी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने सरकार से नीम और शीशम जैसे पर्यावरण हितैषी वृक्ष लगाने के नाम पर धनराशि प्राप्त की, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग पाई गई।

मौके पर बड़ी संख्या में अंग्रेज़ी बबूल के पेड़ पाए गए, जिन्हें पर्यावरण के लिए हानिकारक माना जाता है। उल्लेखनीय है कि सरकार स्वयं कई क्षेत्रों में अंग्रेज़ी बबूल हटाने के लिए अलग से अभियान चलाती है और धन खर्च करती है। ऐसे में पौधारोपण के नाम पर खर्च किए गए धन और पर्यावरणीय दावों पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी का भी आरोप

माइंस निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर श्रमिक सुरक्षा से जुड़े नियमों की कथित अनदेखी भी सामने आई। आंदोलनकारियों का कहना है कि भारी मशीनरी और खनन गतिविधियों के बीच श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

नौ दिनों से प्रशासन और सरकार की चुप्पी

धरनास्थल पर मौजूद लोगों में सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर दिखाई दे रही है कि लगातार नौ दिनों से एक विधायक स्वयं धरने पर बैठा हुआ है, लेकिन इसके बावजूद सरकार, स्थानीय प्रशासन और कंपनी प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि अब तक न तो कोई ठोस प्रशासनिक हस्तक्षेप हुआ है और न ही कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट समाधान प्रस्तुत किया गया है।

“यह केवल मजदूरों की नहीं, पूरे क्षेत्र के सम्मान की लड़ाई” — रविन्द्र सिंह भाटी

धरनास्थल को संबोधित करते हुए शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि यह आंदोलन केवल मजदूरों की नौकरी बचाने का संघर्ष नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के सम्मान, अधिकार और भविष्य की लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के हक, पर्यावरण और श्रमिकों की गरिमा के साथ समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भाटी ने कहा कि जब तक श्रमिकों और ग्रामीणों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर तक ले जाया जाएगा।

आंदोलन बनता जा रहा बड़ा जनसंग्राम

धरनास्थल पर पिछले कुछ दिनों से महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में लोग रोज़ाना आंदोलन के समर्थन में पहुँच रहे हैं।

गिरल लिग्नाइट माइंस का यह आंदोलन अब पूरे पश्चिमी राजस्थान में चर्चा का विषय बन चुका है और इसे क्षेत्र के स्थानीय अधिकारों एवं संसाधनों की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।