ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और नॉर्डिक देशों ने हरित प्रौद्योगिकी, नवाचार और सतत विकास को साझेदारी का केंद्रीय आधार बनाने पर सहमति जताई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आइसलैंड की जियोथर्मल और मत्स्य विशेषज्ञता, नॉर्वे की ब्लू इकोनॉमी और आर्कटिक क्षमता, तथा स्वीडन, फिनलैंड और डेनमार्क की विनिर्माण, डिजिटल और साइबर तकनीक को भारत की कौशल क्षमता से जोड़ा जाएगा। उनके अनुसार, इसका उद्देश्य “दुनिया के लिए भरोसेमंद और टिकाऊ समाधान” तैयार करना है।
बैठक में समुद्री सुरक्षा, हरित ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, सप्लाई चेन और निवेश सहयोग जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत और नॉर्डिक देशों ने भारत-ईयू और ईएफटीए व्यापार समझौतों के बाद आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया।
यह 43 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली नॉर्वे यात्रा है। शिखर सम्मेलन में नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड के प्रधानमंत्रियों ने हिस्सा लिया।

