फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के साथ कई अहम बैठकों और चर्चाओं में हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैश्विक एकजुटता और विकासशील देशों की भूमिका को लेकर भारत का पक्ष मजबूती से रखा।
शिखर सम्मेलन के पारंपरिक समूह फोटो में प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और अन्य विश्व नेताओं के साथ नजर आए। मोदी ने कहा कि दुनिया की समृद्धि, स्थिरता और मानव कल्याण के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा।
‘नई साझेदारियां और वैश्विक एकजुटता’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया संसाधनों की नहीं, बल्कि भरोसे की कमी से जूझ रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां तभी सफल हो सकती हैं, जब वे पारस्परिक विश्वास, समानता और साझा जिम्मेदारी पर आधारित हों।
प्रधानमंत्री ने भारत की विदेश नीति के मूल मंत्र ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हमेशा पूरी दुनिया को एक परिवार मानता रहा है। उन्होंने कोविड महामारी के दौरान 150 से अधिक देशों को दवाइयां और वैक्सीन उपलब्ध कराने समेत विभिन्न मानवीय सहायता अभियानों का भी जिक्र किया।
मोदी ने कहा कि ‘ग्लोबल साउथ’ अब सहायता नहीं, बल्कि बराबरी की साझेदारी चाहता है। विकासशील देश केवल लाभार्थी नहीं बने रहना चाहते, बल्कि वैश्विक विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनना चाहते हैं। उन्होंने पारंपरिक दाता-प्राप्तकर्ता मॉडल से आगे बढ़कर सम्मान और सहभागिता आधारित सहयोग की वकालत की।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने क्षेत्र में शांति प्रयासों का स्वागत किया और कहा कि संघर्षों का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही संभव है। उन्होंने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की रक्षा को भी वैश्विक प्राथमिकता बताया।
सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई नेताओं से द्विपक्षीय वार्ता भी प्रस्तावित है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी संभावित मुलाकात पर भी अंतरराष्ट्रीय नजरें टिकी हुई हैं।
G7 सम्मेलन में भारत की यह 13वीं भागीदारी है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी लगातार सातवीं बार इस मंच पर शामिल हुए हैं। इससे पहले उन्होंने स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा कर दोनों देशों के संबंधों को ‘व्यापक साझेदारी’ (Comprehensive Partnership) के स्तर तक पहुंचाने की घोषणा की थी।

