पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं,सरकार ने दी सफाई;विपक्ष ने उठाए सवाल

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भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट को कभी भी नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया है। सरकार ने कहा कि यह कोई नई नीति नहीं है, बल्कि पासपोर्ट अधिनियम 1967 और अदालतों की पुरानी व्याख्याओं के अनुरूप स्थापित कानूनी स्थिति है।

विदेश मंत्रालय की हालिया टिप्पणी के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई। मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा दस्तावेज़ है, न कि नागरिकता साबित करने वाला अंतिम दस्तावेज़। इस बयान पर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए और पूछा कि फिर नागरिकता का आधार क्या होगा।

सरकार ने कहा कि नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत होता है, जिसमें जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता के रिकॉर्ड, मतदाता सूची, स्कूल रिकॉर्ड और अन्य सरकारी दस्तावेज़ों को आधार माना जाता है।

इस बीच भाजपा नेता अमित मालवीय ने कहा कि पासपोर्ट अहम पहचान और यात्रा दस्तावेज जरूर है, लेकिन नागरिकता का अधिकार संविधान और नागरिकता कानून से तय होता है, किसी एक दस्तावेज से नहीं। वहीं राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस पर सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।