राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष:उपराष्ट्रपति बोले-चुनाव जीतने से अधिक महत्वपूर्ण जनता की सेवा

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जयपुर: राजस्थान विधानसभा के 75वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘विधायी गौरव यात्रा: पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों के समागम’ का बुधवार को समापन हुआ। समापन सत्र में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, राज्यपाल हरिभाऊ बागडे, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व एवं वर्तमान विधायक शामिल हुए।

उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि चुनाव जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन जनता की सेवा करना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन सभी जनप्रतिनिधियों की प्रतिबद्धता जनता और संविधान के प्रति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बहस, चर्चा और कभी-कभी व्यवधान भी अंततः किसी निर्णय तक पहुंचने चाहिए।

उन्होंने राज्य विधानसभाओं को भारतीय लोकतंत्र की “जीवंत धड़कन” बताते हुए कहा कि संसद जहां राष्ट्रीय आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं विधानसभाएं गांव, कस्बों और आम नागरिकों की आवाज़ को मंच देती हैं। उन्होंने कहा कि स्थायी सम्मान चुनावी जीत से नहीं, बल्कि ईमानदार जनसेवा से मिलता है। अपने संबोधन में उन्होंने महाराणा प्रताप और चेतक का उल्लेख करते हुए कहा कि इतिहास केवल नायकों को ही नहीं, बल्कि उनके साथ निष्ठापूर्वक योगदान देने वालों को भी याद रखता है।

उपराष्ट्रपति ने पूर्व और वर्तमान विधायकों को एक मंच पर लाने की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक अनुभवों का आदान-प्रदान होता है और नई पीढ़ी के जनप्रतिनिधियों को सीखने का अवसर मिलता है। उन्होंने विधायकों से सदन की कार्यवाही, समितियों और जनसंपर्क में सक्रिय भूमिका निभाने का भी आग्रह किया।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि विधानसभा के 75 वर्ष पूरे होने का यह आयोजन लोकतंत्र के अनुभव, समृद्ध परंपराओं और मूल्यों का संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा ने पिछले 75 वर्षों में कई महत्वपूर्ण फैसलों के जरिए प्रदेश के विकास और जनकल्याण की दिशा तय की है तथा तकनीक, पारदर्शिता और जनभागीदारी को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विकसित राजस्थान-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में विधानसभा की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें देश की प्राचीन संस्कृति और गणराज्य परंपरा में निहित हैं। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने और सार्वजनिक संवाद में शालीनता की आवश्यकता पर बल दिया।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि ‘विधायी गौरव यात्रा’ केवल एक समारोह नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों, अनुभव और संवाद का मंच है। उन्होंने कहा कि जनहित के मुद्दों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर काम करने से राजस्थान के सर्वांगीण विकास को गति मिलेगी।

समारोह के दौरान विधानसभा की लोकतांत्रिक परंपराओं में योगदान देने वाले कई पूर्व एवं वर्तमान विधायकों को सम्मानित किया गया। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, कार्यक्रम में 237 पूर्व विधायक, 163 वर्तमान विधायक और 10 अन्य पूर्व विधायक सहित कुल 410 जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।