राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार को अलग-अलग जिलों में कार्रवाई करते हुए एक सरकारी डॉक्टर, एक ग्राम विकास अधिकारी और नगर पालिका से जुड़े एक संविदाकर्मी को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। तीनों मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
पाली जिले के सोजत रोड में एसीबी ने नगर पालिका से जुड़े संविदाकर्मी परमानंद शर्मा को 25 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। एसीबी के अनुसार, पैतृक भूखंड का पट्टा जारी कराने के बदले यह राशि मांगी गई थी। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी ने रिश्वत की रकम अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम पर मांगी थी। एसीबी ने यह भी बताया कि आरोपी सेवानिवृत्त होने के बावजूद कथित तौर पर अपने बेटे के नाम पर संविदा व्यवस्था के जरिए काम कर रहा था। इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
श्रीगंगानगर जिले के घड़साना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एसीबी ने स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. महेंद्र सिंह को 3,500 रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। शिकायत के मुताबिक, गर्भ में मृत भ्रूण की सफाई (मेडिकल प्रक्रिया) करने के बदले डॉक्टर ने पहले 4,000 रुपये की मांग की थी और बाद में 3,500 रुपये लेते हुए एसीबी की ट्रैप कार्रवाई में पकड़े गए।
वहीं, जोधपुर जिले की ठाडिया ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी रामनरेश मीणा को प्रधानमंत्री आवास योजना की तीसरी किस्त जारी करने और मकान का फोटो अपलोड करने के एवज में 3,500 रुपये की कथित रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। एसीबी के अनुसार, शिकायत का सत्यापन करने के बाद ट्रैप की कार्रवाई की गई।
एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन में तीनों मामलों की जांच जारी है। ब्यूरो का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

