गुजरात में मॉनसून का कहर:मूसलाधार बारिश से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात,रेड अलर्ट जारी

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हर्षित नागदा की रिपोर्ट

अहमदाबाद, 25 जुलाई 2026:-दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की भारी बारिश ने गुजरात में भारी तबाही मचाई है। राज्य के कई हिस्सों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।

अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, नवसारी और वलसाड समेत सौराष्ट्र-कच्छ क्षेत्र के कई जिलों में सड़कों पर कई फीट पानी भर गया है। भारी जलभराव के कारण कई शहरों का सड़क संपर्क टूट गया है, जबकि नदियां और जलाशय उफान पर हैं।

मौसम विभाग का रेड अलर्ट

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, अरब सागर से आ रही नमी और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण गुजरात में अगले 24 से 48 घंटों तक भारी से अत्यधिक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।

मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों के लिए ‘रेड’ और ‘ऑरेंज’ अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें और अनावश्यक यात्रा से बचें।

निचले इलाकों से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू

लगातार हो रही बारिश के कारण शहरों के निचले इलाकों में पानी भर चुका है, जिससे हजारों लोग अपने घरों में फंस गए हैं। बिगड़ते हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और आपदा प्रबंधन (NDRF/SDRF) की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है।

जलभराव वाले संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन के मुताबिक, नदियों के बढ़ते जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

देश के अन्य राज्यों में भी मॉनसून की रफ्तार

गुजरात के अलावा पड़ोसी राज्यों में भी मॉनसून ने रौद्र रूप अख्तियार कर लिया है:

  • राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
  • महाराष्ट्र में भी मानसूनी बारिश के चलते प्रशासन हाई अलर्ट पर है।

बदलते मौसम चक्र की चुनौती

मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण हाल के वर्षों में वेदर पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है। अब बेहद कम समय में अत्यधिक बारिश (Extreme Rainfall) की घटनाएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलते चक्र से निपटने के लिए शहरों की जल निकासी (Drainage System) को मजबूत करना और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन योजनाएं बनाना बेहद जरूरी हो गया है।