बेंगलुरु: कर्नाटक में मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने सोमवार को मंत्रिमंडल का पहला विस्तार किया। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने 19 विधायकों को मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इसके साथ ही मुख्यमंत्री सहित मंत्रिपरिषद की संख्या संवैधानिक सीमा 34 के करीब पहुंच गई।
नए मंत्रियों में पीएम नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगदागी, रुद्रप्पा लमानी, के.एस. बसवंतप्पा, बी. नागेंद्र, टी. रघुमूर्ति, बी.जेड. जमीर अहमद खान, रिजवान अरशद, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, पुत्तुरंगाशेट्टी, एस.एस. मल्लिकार्जुन, अजय सिंह, एन. चालुवराया स्वामी, के.एम. शिवलिंगे गौड़ा, एच.सी. बालकृष्ण, बसवराज रायरेड्डी, विजयानंद कशप्पनवर और लक्ष्मण सावदी शामिल हैं।
कांग्रेस हाईकमान की मंजूर सूची में गायत्री शांतेगौड़ा का नाम भी था, लेकिन उन्होंने शपथ नहीं ली। इसके चलते विस्तार के बाद भी मंत्रिमंडल में कोई महिला मंत्री शामिल नहीं हो सकी।
इस विस्तार में कई नए चेहरों के साथ सिद्धारमैया सरकार के पूर्व मंत्री भी लौटे हैं। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्रियों एस. बंगारप्पा और एन. धर्म सिंह के पुत्र मधु बंगारप्पा और अजय सिंह को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली। सिद्धारमैया के पुत्र डॉ. यतींद्र सिद्धारमैया पहले से ही मंत्रिमंडल का हिस्सा हैं।
मंत्रिमंडल विस्तार के साथ कांग्रेस ने विधानसभा और विधान परिषद के प्रमुख पदों पर भी नियुक्तियों को मंजूरी दी। जी.एस. पाटिल को विधानसभा अध्यक्ष, ए.एस. पोनन्ना को उपाध्यक्ष, सलीम अहमद को विधान परिषद का सभापति और उमाश्री को उपसभापति बनाए जाने का फैसला किया गया।
हालांकि, कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष भी सामने आया। वरिष्ठ कांग्रेस विधायक यशवंतरायगौड़ा वी. पाटिल ने मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिनेश गुंडू राव, टी.बी. जयचंद्र और अन्य नेताओं ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराज़गी जाहिर की। कई नेताओं का कहना है कि अनुभव और वरिष्ठता को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
कर्नाटक की राजनीति में लिंगायत, वोक्कालिगा और कुरबा समुदायों का प्रभाव अहम माना जाता है। कांग्रेस ने मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार का फोकस विकास कार्यों के साथ 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी पर रहेगा।

