आशीष विद्यार्थी बोले—मुंबई वह शहर है,जहां टूटे सपनों के बाद फिर सपने देखने की हिम्मत मिलती है

Jaipur Rajasthan

राजस्थान के जेईसीआरसी फाउंडेशन के ओरिएंटेशन कार्यक्रम ‘परिचय’ में छात्रों से बातचीत के दौरान आशीष विद्यार्थी ने बताया कि वे जिस फिल्म में काम करने के लिए मुंबई गए थे, वह फिल्म आज तक नहीं बन पाई।

उन्होंने कहा कि हालांकि वह मौका फिल्म तक नहीं पहुंच सका, लेकिन मुंबई जाने के फैसले ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

“मुंबई मेरे लिए सपनों का शहर नहीं है। यह वह शहर है, जहां सपने टूटने के बाद फिर से सपने देखने की हिम्मत मिलती है।”

आशीष विद्यार्थी ने छात्रों से कहा कि अतीत को बदला नहीं जा सकता, लेकिन भविष्य को बदला जा सकता है। उनके मुताबिक, जो छात्र अपने घर और परिवार से दूर नए शहर में पढ़ने आते हैं, उनके सामने आने वाली चुनौतियां उन्हें आगे के जीवन के लिए तैयार करती हैं।

‘द्रोहकाल’ और संघर्ष के दिनों का अनुभव

उन्होंने अपने शुरुआती करियर का जिक्र करते हुए फिल्म निर्देशक गोविंद निहलानी की फिल्म ‘द्रोहकाल’ से जुड़े अनुभव भी साझा किए। इसी फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।

विद्यार्थी ने कहा कि संघर्ष और सीमित संसाधनों के दौर ने उन्हें सिखाया कि किसी भी क्षेत्र में लगातार खुद को बेहतर बनाना जरूरी है।

उन्होंने अपनी कार्यशैली के बारे में कहा कि हर काम पूरा करने के बाद वह खुद से पूछते हैं कि “जरा सा और क्या किया जा सकता था?”

आशीष विद्यार्थी के अनुसार, यही सोच उन्हें लगातार सीखते रहने और अपने काम में कुछ नया करने के लिए प्रेरित करती है।

‘गॉसिप और तुलना से दूर रहें’

छात्रों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि लगातार दूसरों से अपनी तुलना करना आत्मविश्वास को कमजोर कर सकता है।

उन्होंने छात्रों से अपने समय का इस्तेमाल अपनी क्षमताओं को पहचानने और नए कौशल विकसित करने में करने की अपील की। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति की पहचान उसकी काबिलियत और लगातार सीखने की इच्छा से बनती है।

आशीष विद्यार्थी ने कहा कि उन्होंने अब तक 350 से अधिक फिल्मों और कई भाषाओं में काम किया है, लेकिन आज भी वह खुद को एक छात्र की तरह सीखने वाला व्यक्ति मानते हैं।

कोविड के दौरान सोशल मीडिया की ओर रुख

उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के दौरान जब फिल्म और अन्य कामकाज प्रभावित हुए, तब उन्होंने सोशल मीडिया पर सक्रिय होना शुरू किया। उनके अनुसार, आज उनके विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर करीब 11 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

उन्होंने छात्रों से बदलती परिस्थितियों के साथ नए अवसर तलाशने की अपील की।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने छात्रों को संदेश देते हुए कहा कि जीवन में खुशी हमेशा बनी रहे, यह जरूरी नहीं, लेकिन उम्मीद को हमेशा अपने साथ रखना चाहिए।