जयपुर। 2 सितंबर, 2026। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को अपने निवास पर बड़ी संख्या में पहुंचे दिव्यांगजन से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके साथ विस्तृत संवाद किया। डेढ़ घंटे से अधिक चले इस संवाद कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए दिव्यांगजन ने अपनी समस्याएं गहलोत के सामने रखीं। इस दौरान कई दिव्यांगजन ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए सरकारी योजनाओं, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं, RGHS में दवाएं न मिलने, रोजगार, आवास और प्रशासनिक स्तर पर लंबित मामलों से जुड़ी परेशानियां बताईं।
जो सरकार आयुक्त की नियुक्ति नहीं कर सकती, उससे क्या उम्मीद रखें :
गहलोत ने दिव्यांगजन आयुक्त की नियुक्ति नहीं होने को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि उनकी सरकार के दौरान तीन बार निःशक्तजन आयुक्त की नियुक्ति की गई थी, लेकिन वर्तमान सरकार में अभी तक दिव्यांगजन आयुक्त की नियुक्ति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को आयुक्त के पद का महत्त्व समझना चाहिए , आयुक्त दिव्यांगजनों की समस्याओं की सुनवाई कर सकता है और उनके हित में आवश्यक आदेश पारित कर सकता है।
उन्होंने कहा, “जो सरकार दिव्यांगजन आयुक्त की नियुक्ति नहीं कर सकती, उससे क्या उम्मीद रखें कि वह दिव्यांगजनों के लिए हाउसिंग बोर्ड की योजना बनाएगी।” उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में तत्काल पत्र लिखकर दिव्यांगजन आयुक्त की नियुक्ति की मांग करेंगे।
दो दिव्यांग विश्वविद्यालय बनाए, सरकारों को अच्छे काम आगे बढ़ाने चाहिए :
गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए दो विश्वविद्यालय बनाए और इसके लिए एक्ट भी बनाया गया था, लेकिन वर्तमान सरकार में इनका काम आगे नहीं बढ़ पाया। उन्होंने कहा कि जयपुर में कुलपति की नियुक्ति के बावजूद उन्हें काम नहीं करने दिया गया और अब उनका इस्तीफा भी हो चुका है।
उन्होंने कहा कि यदि दुनिया को यह पता चले कि राजस्थान में बाबा आमटे जैसे महान व्यक्तित्व के नाम पर विश्वविद्यालय बनाया गया, लेकिन वह केवल कागजों में ही है, तो इससे राजस्थान के बारे में क्या संदेश जाएगा। उन्होंने इसे अफसोसजनक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन सरकार बदलने के साथ अच्छे काम रुकने नहीं चाहिए। जनहित के कामों को आगे बढ़ाना सरकारों की जिम्मेदारी है।
सामाजिक सुरक्षा पेंशन कम से कम 3,000 रुपये हो :
सामाजिक सुरक्षा पेंशन का उल्लेख करते हुए गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने पेंशन में प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रावधान किया था। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से अभी 200-300 रुपये जैसी बेहद कम राशि पेंशन के रूप में दी जाती है, जबकि महंगाई के इस दौर में यह राशि पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर कम से कम 3,000 रुपये प्रतिमाह करनी चाहिए। केंद्र सरकार के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारें 50-50 प्रतिशत राशि वहन करके जरूरतमंद बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद कर सकती हैं।
कॉक्लियर इम्प्लांट की निशुल्क सुविधा राजस्थान से शुरू की :
गहलोत ने कहा कि जब वे दूसरी बार मुख्यमंत्री थे, तब उनकी सरकार ने राजस्थान में कॉक्लियर इम्प्लांट की सुविधा निशुल्क शुरू की थी। उन्होंने कहा कि इस योजना को लगातार आगे बढ़ाया गया और बाद में भारत सरकार को भी कॉक्लियर इम्प्लांट को लेकर निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने इस क्षेत्र में देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया था और ऐसी जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
RGHS में दवाओं की उपलब्धता नहीं होना गंभीर समस्या
संवाद के दौरान दिव्यांगजन ने RGHS के तहत दवाएं उपलब्ध नहीं होने की समस्या भी गहलोत के सामने रखी। इस पर गहलोत ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता में किसी भी तरह की बाधा जरूरतमंद लोगों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। दिव्यांगजन से जुड़ी ऐसी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाना चाहिए।
“आप निश्चिंत रहें, आपकी समस्याएं सरकार तक पहुंचाएंगे”
गहलोत ने संवाद के अंत में दिव्यांगजनों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे निश्चिंत रहें। आज की बैठक में सामने आई समस्याओं और मांगों पर दोबारा बैठकर चर्चा की जाएगी और शीघ्र ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उनका ध्यान इस महत्वपूर्ण वर्ग की समस्याओं की ओर आकर्षित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन के जीवन में होने वाले संघर्षों को समझना और उनके सम्मान एवं अधिकारों की रक्षा करना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन दिव्यांगजनों के कल्याण और उनके सम्मान से जुड़े कार्य निरंतर आगे बढ़ने चाहिए

