नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही,पीएम बालेन शाह ने भारत-चीन की मदद के लिए जताया आभार

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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों के लिए भारत और चीन का आभार जताया है। बुधवार को संसद में सरकार की कार्रवाई का ब्यौरा देते हुए उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में दोनों पड़ोसी देशों ने समय पर राहत सामग्री, तकनीकी सहायता और बचाव दल भेजे।

प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि बाढ़ की जानकारी मिलते ही सरकार ने आपात बैठक बुलाई और हेलिकॉप्टरों को तैयार रखा गया। उन्होंने कहा कि लोगों की जान बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता थी और प्रभावित इलाकों में सेना के हेलिकॉप्टरों को बचाव अभियान के लिए लगाया गया।

शाह के मुताबिक, अब तक करीब 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि हजारों लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव के लिए सरकार ने प्रभावित जिलों में आर्थिक सहायता भी भेजी है। विदेशी नागरिकों की तलाश के लिए अलग टीम बनाई गई है, जबकि महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को बचाव अभियान में प्राथमिकता दी गई।

भारत ने भेजी राहत की पांचवीं खेप

नेपाल सरकार के मुताबिक, भारत ने राहत सामग्री की पांचवीं खेप भेजी है। भारतीय टीमें प्रभावित इलाकों में सर्च और रेस्क्यू अभियान के साथ-साथ सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और मृतकों की पहचान में भी मदद कर रही हैं।

नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने बताया कि भारत मृतकों की पहचान के लिए डीएनए जांच में भी सहायता कर रहा है और डीएनए प्रबंधन के लिए प्रयोगशाला तैयार करने में सहयोग दे रहा है।

चीन ने भी राहत अभियान में मदद की है। बाढ़ से प्रभावित इलाकों तक राहत दलों की पहुंच आसान बनाने के लिए चीन ने ग्यिरोंग बॉर्डर तक जाने वाला हाईवे खोल दिया है।

‘यह सिर्फ कुछ जिलों की त्रासदी नहीं’

संसद में बोलते हुए बालेन शाह ने कहा कि रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में हुई तबाही सिर्फ इन जिलों की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के लिए साझा संकट है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में देश के नेतृत्व की जिम्मेदारी लोगों को भरोसा और हिम्मत देने की है। शाह ने कहा कि सरकार दुख में डूबने के बजाय दृढ़ संकल्प और साहस के साथ राहत-बचाव अभियान जारी रखेगी।

नेपाल पुलिस के बुधवार के आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1,127 तक पहुंच गई थी। हालांकि, अलग-अलग सरकारी अपडेट में मृतकों और लापता लोगों की संख्या में अंतर सामने आया है। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं के कर्मचारी भी लापता बताए गए हैं और आशंका है कि कुछ लोग अब भी सुरंगों में फंसे हो सकते हैं।