नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा 2026 को सर्वसम्मति से मंज़ूरी दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा को अपनाए जाने का ऐलान करते हुए कहा कि किसी भी सदस्य ने इस पर आपत्ति नहीं जताई।
दो दिन चले सम्मेलन में आतंकवाद, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, वैश्विक व्यापार, परमाणु सुरक्षा और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
बैठक से पहले घोषणा को लेकर सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद थे। बताया गया कि शनिवार तड़के चार बजे तक बातचीत चलती रही। भारत ने अलग-अलग देशों के रुख के बीच सहमति बनाने के लिए लगातार बातचीत की।
पहलगाम हमले की निंदा, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख
नई दिल्ली घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।
BRICS देशों ने आतंकवाद के हर रूप और हर वजह की निंदा करते हुए कहा कि इसे किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
घोषणा में आतंकवाद की फंडिंग, आतंकियों की सीमा पार आवाजाही और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया।
सदस्य देशों ने संयुक्त राष्ट्र के तहत प्रस्तावित कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म को जल्द अंतिम रूप देने और अपनाने की मांग भी की।
पश्चिम एशिया में तनाव पर चिंता
BRICS देशों ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर गंभीर चिंता जताई और सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की।
घोषणा में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा गया कि विवादों का समाधान बातचीत, कूटनीति और परामर्श के जरिए किया जाना चाहिए।
गाज़ा की स्थिति पर BRICS ने युद्धविराम बनाए रखने और मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की।
घोषणा में फ़लस्तीनियों के जबरन विस्थापन का विरोध किया गया और 1967 की सीमाओं के आधार पर एक संप्रभु और स्वतंत्र फ़लस्तीनी राष्ट्र के गठन के समर्थन को दोहराया गया, जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो।
BRICS ने फ़लस्तीन की संयुक्त राष्ट्र में पूर्ण सदस्यता के समर्थन की बात भी दोहराई।
परमाणु खतरे को लेकर चिंता
BRICS देशों ने दुनिया में बढ़ते परमाणु खतरे और सैन्य तनाव पर चिंता जताई।
घोषणा में निरस्त्रीकरण, हथियार नियंत्रण और परमाणु अप्रसार व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई गई। मध्य पूर्व को परमाणु हथियारों और अन्य व्यापक विनाश के हथियारों से मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में प्रयास तेज करने की अपील भी की गई।
मोदी ने अगले 20 साल का एजेंडा बनाने का प्रस्ताव रखा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए एक नया और महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने का प्रस्ताव रखा।
उन्होंने कहा कि BRICS की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे संगठन के फैसलों और पहलों की निरंतरता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
इसके लिए मोदी ने ‘ट्रोइका’ आधारित निरंतरता और कार्यान्वयन व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया। इसमें पिछली, मौजूदा और अगली अध्यक्षता वाले देशों के बीच समन्वय शामिल होगा।
उन्होंने फैसलों की प्रगति पर नजर रखने के लिए एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें हर फैसले के लिए जिम्मेदार संस्था, समयसीमा और उसकी स्थिति दर्ज की जा सके।
ग्लोबल साउथ को ‘रूल-टेकर’ नहीं ‘रूल-शेपर’ बनाने पर जोर
मोदी ने वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने की जरूरत बताई।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों का सामना करने में सबसे आगे है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय फैसले लेने की प्रक्रिया में पीछे है।
प्रधानमंत्री ने वैश्विक शासन व्यवस्था को ‘पिरामिड ऑफ प्रिविलेज’ से ‘प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप’ में बदलने की बात कही।
उन्होंने BRICS देशों से वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें अगले शिखर सम्मेलन तक BRICS Reform Roadmap में बदलने का सुझाव दिया।
मोदी के मुताबिक इस रोडमैप के तीन प्रमुख आधार होने चाहिए—Representation, Responsiveness और Rule-making।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को और टालने के खिलाफ बात कही और कहा कि इस मुद्दे पर तय समयसीमा और स्पष्ट परिणामों के साथ बातचीत होनी चाहिए।
AI और नई तकनीकों के नियमों में विकासशील देशों की भागीदारी
मोदी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष, बायोटेक्नोलॉजी और दूसरी महत्वपूर्ण तकनीकें भविष्य के नियमों को तय कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ को केवल नियमों का पालन करने वाला पक्ष नहीं, बल्कि नियम बनाने में भूमिका निभाने वाला पक्ष बनना चाहिए।
इसके लिए BRICS के जरिए युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत, कानून और अंतरराष्ट्रीय वार्ता की व्यावहारिक ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया गया।
नाविकों के लिए इमरजेंसी नेटवर्क का प्रस्ताव
वैश्विक व्यापार में नाविकों की भूमिका का जिक्र करते हुए मोदी ने Seafarers Emergency Support Network बनाने का सुझाव दिया।
इस नेटवर्क के जरिए संकट में फंसे नाविकों के लिए आपात सूचना, मेडिकल मदद, परिवारों तक जानकारी पहुंचाने और सुरक्षित निकासी में मदद की जा सकेगी।
व्यापार और टैरिफ पर BRICS का रुख
नई दिल्ली घोषणा में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापारिक प्रतिबंधों पर चिंता जताई गई।
BRICS देशों ने कहा कि अचानक बढ़ाए गए शुल्क और व्यापारिक पाबंदियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करती हैं और विकासशील देशों के लिए मुश्किलें बढ़ाती हैं।
घोषणा में विश्व व्यापार संगठन यानी WTO को मजबूत करने और उसके विवाद निपटारे की व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अधिकार क्षेत्र के बाहर लगाए गए एकतरफा और सेकेंडरी प्रतिबंधों की भी आलोचना की।
BRICS के 20 साल पूरे, मोदी ने कहा—अब नई जिम्मेदारी का समय
इस साल BRICS के गठन के 20 साल पूरे हुए हैं। सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे संगठन के लिए ‘परिपक्वता और जिम्मेदारी’ के नए चरण की शुरुआत बताया।
भारत की 2026 की BRICS अध्यक्षता का विषय ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ रखा गया था।
मोदी ने भारत की अध्यक्षता के दौरान सहयोग के लिए सदस्य देशों का आभार जताया। उन्होंने बताया कि अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकें आयोजित की गईं और करीब 30 शहरों में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मेजबानी की गई।
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के 20 साल पूरे होने के मौके पर दो डाक टिकट भी जारी किए।
इस बीच मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान समेत BRICS नेताओं के साथ भारत मंडपम में ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का भी दौरा किया।
BRICS में इस समय ब्राज़ील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात समेत 11 देश शामिल हैं।

