BRICS समिट का समापन:मोदी ने कहा- दुनिया को अब BRICS से ठोस नतीजों की उम्मीद

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नई दिल्ली में दो दिन तक चले BRICS शिखर सम्मेलन का रविवार को समापन हो गया। सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि BRICS अब अपने तीसरे दशक में प्रवेश कर रहा है और दुनिया को इस समूह से केवल विचारों और प्रतिबद्धताओं के बजाय ठोस नतीजों की उम्मीद है।

समापन सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज़ को प्रमुखता देने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि BRICS के प्रति ग्लोबल साउथ का भरोसा बढ़ा है क्योंकि यहां उनकी बात सुनी जाती है और उनके अनुभवों को महत्व दिया जाता है।

मोदी ने कहा कि BRICS में सहयोग को केवल सरकारों तक सीमित रखने के बजाय उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

‘टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों को हथियार न बनाया जाए’

प्रधानमंत्री ने कहा कि महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने यह दिखाया है कि दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से कितनी जुड़ी हुई हैं।

उन्होंने BRICS देशों से मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने की अपील की। मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी और जरूरी खनिजों का इस्तेमाल हथियार की तरह नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे वैश्विक विकास और आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है।

उन्होंने कहा कि BRICS देशों को लचीली सप्लाई चेन और मजबूत कनेक्टिविटी के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

चीन को अगली BRICS अध्यक्षता के लिए शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS की अगली अध्यक्षता संभालने वाले चीन को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने नई दिल्ली सम्मेलन को सफल बनाने के लिए सदस्य देशों के नेताओं और उनकी टीमों का आभार जताया।

चीन 2027 में BRICS की अध्यक्षता करेगा और 19वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

शी जिनपिंग और पुतिन के साथ दिखे मोदी

समिट के दूसरे दिन भारत मंडपम में BRICS नेताओं का ग्रुप फोटो सेशन हुआ। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के दोनों ओर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नजर आए।

मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक भी हुई। शी जिनपिंग ने BRICS में ग्लोबल साउथ की भूमिका को मजबूत करने की बात कही और समूह को अंतरराष्ट्रीय मामलों में सकारात्मक और स्थिर भूमिका निभाने वाला मंच बनाने पर जोर दिया।

शी जिनपिंग रविवार को BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद नई दिल्ली से रवाना हो गए।

नई दिल्ली डेक्लरेशन में आतंकवाद और वैश्विक तनाव पर रुख

BRICS देशों ने सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली डेक्लरेशन 2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इसमें अंतरराष्ट्रीय शांति, वैश्विक व्यापार, आतंकवाद और पश्चिम एशिया में जारी तनाव समेत कई मुद्दों पर साझा रुख सामने रखा गया।

घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की गई, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। BRICS देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा करते हुए आतंकवाद की फंडिंग, सीमा पार आतंकवाद और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने देने के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया।

घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भी चिंता जताई गई और संघर्षों का समाधान बातचीत, कूटनीति और शांतिपूर्ण तरीकों से करने की बात कही गई।

वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर जोर

BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक पाबंदियों पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे कदम वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन को प्रभावित करते हैं।

घोषणापत्र में WTO के नियमों के अनुरूप एक खुले, पारदर्शी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही गई।

मोदी ने 20 साल के लिए नया एजेंडा सुझाया

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS के अगले 20 वर्षों के लिए नया और महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने का प्रस्ताव दिया था।

उन्होंने BRICS के कामकाज में निरंतरता बनाए रखने के लिए ‘ट्रोइका’ व्यवस्था और फैसलों की निगरानी के लिए एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी बनाने का सुझाव दिया।

मोदी ने वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार के लिए 10 प्रस्ताव तैयार करने की बात भी कही। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत बताते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ को अंतरराष्ट्रीय नियम बनाने की प्रक्रिया में ‘रूल-टेकर’ के बजाय ‘रूल-शेपर’ की भूमिका में आना चाहिए।

समिट के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि BRICS के तीसरे दशक में प्रवेश के साथ अब समूह के सामने अपने साझा संकल्पों को जमीन पर उतारने की चुनौती है।