भजनलाल शर्मा का कांग्रेस पर हमला-‘तथ्य हैं तो प्रमाण दें,संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना बंद करें’

Jaipur Rajasthan

जयपुर, 27 सितंबर 2026। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमजोर करने और चुनावी हार को छिपाने के लिए तथ्यहीन राजनीति कर रही है। कांग्रेस की राजनीति अब जनता के बीच काम करने के बजाय झूठे आरोपों और भ्रम फैलाने तक सीमित रह गई है। चुनाव में हार मिलने पर कांग्रेस अपनी कमियों और जनसमर्थन की कमी की समीक्षा करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगती है। कांग्रेस को आरोप-प्रत्यारोप और झूठे प्रपंच की राजनीति छोड़कर जनता के बीच जाने, उनकी समस्याओं को समझने और उनके दुख-दर्द में साथ खड़े होने की आदत डालनी चाहिए। जनता सब देखती और समझती है। यदि कांग्रेस के पास किसी आरोप के समर्थन में तथ्य और प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक करना चाहिए, अन्यथा संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का प्रयास बंद करना चाहिए। राजनीति मेहनत, सत्य और ईमानदारी से होती है, केवल आरोप लगाने से नहीं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा 26 सितंबर को जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर सहित प्रमुख निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि 24 जून 2025 के मूल आदेश तथा विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी समय-सारणी को लेकर भी निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि निर्णय पूरे आयोग की सहमति से लिए गए थे। ऐसे में कांग्रेस द्वारा आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर किए गए दावों का आधार क्या है और 27 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा एसआईआर प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध ठहराए जाने के बावजूद कांग्रेस लगातार इस प्रक्रिया पर सवाल क्यों उठा रही है ? कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि न्यायिक प्रक्रिया के बाद किसी प्रक्रिया पर राजनीतिक आरोप लगाने के लिए उसके पास ठोस तथ्य और प्रमाण क्या हैं। बिना निर्वाचन आयोग का पक्ष जाने किसी मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल क्यों उठाए गए?

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के अनुसार एसआईआर से जुड़े संबंधित फॉर्म को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखा गया था, जबकि गैर-एसआईआर अवधि में लागू नियमों के तहत निर्धारित फॉर्म का ही उपयोग किया जाएगा। ऐसे में यदि कांग्रेस नियमों में बदलाव का दावा करती है तो उसे उस बदलाव का आधिकारिक दस्तावेज जनता के सामने रखना चाहिए। निर्वाचन आयोग द्वारा पात्र मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष कैंप लगाए जा रहे हैं तथा रैन बसेरों, मजदूरों और बेघर लोगों तक पहुंचने के साथ-साथ छूटे हुए मतदाताओं के घर-घर जाकर बीएलओ द्वारा फॉर्म एकत्र किए जा रहे हैं। मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने और पात्र मतदाताओं को जोड़ने के इन प्रयासों पर भी तथ्यात्मक चर्चा होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सिर्फ और सिर्फ झूठ, सनसनी और भ्रम फैलाने का काम कर रही है, लेकिन अब कांग्रेस का झूठ बेनकाब हो गया है। कांग्रेस का इतिहास राहुल गांधी के नेतृत्व में बार-बार ऐसे झूठे और तथ्यहीन मुद्दों को उठाकर भारत की संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का रहा है। उन्होंने विदेश में जाकर भारत की चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बाद में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी। इतना ही नहीं वे भारत की सेना के शौर्य पर भी सवाल उठाते हैं। ऐसे में कांग्रेस और राहुल गांधी जनता को बताए कि उनके पास एसआईआर में कथित मतभेद का प्रमाण क्या है? , कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को एसआईआर से जोड़ने का आधार क्या है?, संबंधित फॉर्म में कथित बदलाव का आधिकारिक दस्तावेज कहां है? , मीडिया रिपोर्ट को राजनीतिक आरोप का आधार बनाने से पहले उसका सत्यापन किया गया था या नहीं? और निर्वाचन आयोग के संयुक्त स्पष्टीकरण के बाद क्या कांग्रेस अपने आरोपों की समीक्षा करेगी?

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और न्यायालयों के संबंध में सार्वजनिक बयान देते समय शब्दों और तथ्यों की जिम्मेदारी भी आवश्यक है। यदि किसी राजनीतिक दल द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाते हैं तो उनके समर्थन में प्रमाण और दस्तावेज भी जनता के सामने रखे जाने चाहिए। चुनावी हार के बाद कांग्रेस अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने का रास्ता अपनाती रही है।