जयपुर, 27 सितंबर: विश्व पर्यटन दिवस के मौके पर जयपुर में आयोजित Rajasthan Creators Conclave 2026 में राजस्थान के पर्यटन को नए अनुभवों, सोशल मीडिया और ग्रामीण पर्यटन से जोड़ने पर जोर दिया गया।
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री दिया कुमारी ने कहा कि पर्यटन की परिभाषा बदल रही है और अब पर्यटक सिर्फ किसी स्मारक पर जाकर तस्वीर खिंचवाने के बजाय स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली का अनुभव करना चाहते हैं।
जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस कॉन्क्लेव में देशभर से 100 से ज्यादा ट्रैवल ब्लॉगर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, स्कूल-कॉलेज के युवा और होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में राजस्थान के नए पर्यटन स्थलों, सोशल मीडिया रील्स और अनछुए डेस्टिनेशन के प्रचार को लेकर चर्चा हुई।
‘अब पर्यटक सिर्फ फोटो नहीं, अनुभव चाहते हैं’
दिया कुमारी ने कहा कि आज के पर्यटक राजस्थान की संस्कृति को करीब से समझना और उसे महसूस करना चाहते हैं। उन्होंने ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग स्थानीय लोगों के रहन-सहन, खान-पान, भाषा और परंपराओं का हिस्सा बनना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि स्मारक और संग्रहालय पर्यटन का महत्वपूर्ण हिस्सा बने रहेंगे, लेकिन इसके साथ स्थानीय संस्कृति, त्योहारों और जीवनशैली को पर्यटन अनुभव से जोड़ना भी जरूरी है।
क्रिएटर्स और युवाओं से पर्यटन की नई दिशा तय करने पर जोर
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया और ट्रैवल क्रिएटर्स आज पर्यटकों की पसंद को प्रभावित कर रहे हैं। इसलिए सरकार नए विचारों के लिए कंटेंट क्रिएटर्स और युवाओं के साथ मिलकर काम करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि सरकार की भूमिका एक ‘फैसिलिटेटर’ की है और पर्यटन को आगे बढ़ाने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र और स्थानीय लोगों की साझेदारी जरूरी है।
अनछुए पर्यटन स्थलों पर फोकस
दिया कुमारी ने राजस्थान के उन पर्यटन स्थलों को सामने लाने पर जोर दिया, जहां अभी अपेक्षाकृत कम पर्यटक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थलों का प्रचार बढ़ने से स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने पर्यटकों से उदयपुर के साथ डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और बांसवाड़ा जैसे इलाकों को भी देखने की अपील की। ग्रामीण पर्यटन के संदर्भ में उन्होंने देवमाली गांव का उदाहरण दिया और कहा कि स्थानीय परंपराओं के साथ जीवन जीने का अनुभव राजस्थान के ग्रामीण पर्यटन की खासियत है।
विरासत और तकनीक के बीच संतुलन पर जोर
दिया कुमारी ने कहा कि तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, पर्यटन में मानवीय जुड़ाव महत्वपूर्ण रहेगा। उन्होंने राजस्थान की कला, संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज और विरासत को सुरक्षित रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि राज्य में सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी समेत बुनियादी पर्यटन सुविधाओं के विकास पर काम किया जा रहा है, ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
जयपुर से आगे राजस्थान के दूसरे इलाकों पर नजर
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान का हर क्षेत्र अपनी अलग पहचान रखता है। जयपुर के परकोटे और हवामहल से लेकर बाड़मेर, पुष्कर, जैसलमेर, जोधपुर और भरतपुर तक अलग-अलग इलाकों में पर्यटकों के लिए अलग अनुभव मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि पर्यटन को कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित रखने के बजाय राज्य के दूसरे हिस्सों को भी पर्यटन मानचित्र पर प्रमुखता से लाने की जरूरत है।
कॉन्क्लेव में ट्रैवल क्रिएटर्स को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति, नए पर्यटन स्थलों के विकास, राजस्थान पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने, ग्रामीण पर्यटन और सामाजिक पर्यटन के क्षेत्र में योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित किया गया।
कॉन्क्लेव में शशांक संघवी, प्रकृति अरोड़ा, आशीष शर्मा, अंकुश शर्मा, श्रेष्ठा शर्मा, कृतिका गोयल और लक्ष्मी शरत समेत कई ट्रैवल क्रिएटर्स ने हिस्सा लिया।
जयपुर में फिटनेस और जनसेवा से जुड़े कार्यक्रम भी हुए
इसी दिन जयपुर के विद्याधर नगर में ग्रीन फिट हाफ मैराथन सीजन-3 आयोजित की गई। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने मैराथन को हरी झंडी दिखाई। पांच किलोमीटर की इस दौड़ में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ दौड़ लगाई।
इसके अलावा विद्याधर नगर की आदर्श आंगनवाड़ी पाठशाला में ‘आंगन मिलन सेवा’ कार्यक्रम में भी दिया कुमारी शामिल हुईं। उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया और न्यूट्री बार वितरित किए। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं की गोद भराई भी कराई गई और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा आशा सहायिकाओं को सम्मानित किया गया।
दिया कुमारी ने सिविल लाइंस में कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 138वां संस्करण भी सुना। इस दौरान उन्होंने जनभागीदारी, सामाजिक सरोकार और राष्ट्रनिर्माण से जुड़े संदेशों का जिक्र किया।

