जयपुर, 26 मार्च। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने पूर्व चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को तथ्यों से कोसों दूर बताते हुए कहा है कि यह बयानबाजी सच्चाई छुपाने और अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने का असफल प्रयास है। जिनके समय में सिस्टम को लूटा गया, व्यवस्थाओं का दम घोंटा गया, कोरोना जैसी आपदा को अवसर बना लिया गया, वे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं। जनता के साथ अन्याय करने वालों को ऐसी बयानबाजी शोभा नहीं देती।
चिकित्सा मंत्री ने कहा है कि जिनके कार्यकाल में स्वास्थ्य क्षेत्र में भ्रष्टाचार चरम पर था, वे आज नैतिकता की बात कर रहे हैं, यह जनता के साथ मजाक है। कौन नहीं जानता कि कोरोना जैसी आपदा में किस तरह लोगों को लूटा गया। दवा, मशीनों और उपकरणों की खरीद में किस तरह के घोटाले हुए। घोटालों की हद यह हो गई कि पूर्व मंत्री को स्वास्थ्य मंत्रालय से हटाना पड़ा।
RGHS बन गया था लूट का लाइसेंस—अब कार्रवाई से दर्द क्यों?
कांग्रेस सरकार ने RGHS जैसी योजना को बिना तैयारी, बिना नियंत्रण और बिना जवाबदेही के लागू कर सरकारी खजाने को लूट का खुला माध्यम बना दिया गया था। पूर्व सरकार के समय फर्जी बिल, बिना मरीज इलाज, अनावश्यक MRI और महंगी दवाओं के जरिए करोड़ों रुपये के क्लेम उठाए गए, क्या यही उनकी “मॉडल हेल्थ व्यवस्था” थी? आज जब हमारी सरकार उन गड़बड़ियों की जांच कर रही है, FIR दर्ज कर रही है और वसूली कर रही है, तब विपक्ष को तकलीफ हो रही है।
MRI पर ज्ञान देने से पहले अपनी नाकामी देखें
हीलियम और MRI को लेकर दिए गए बयानों पर मंत्री ने कहा कि जो लोग अपने समय में स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं कर पाए, वे आज तकनीकी मुद्दों पर भ्रम फैलाकर जनता को डराने का प्रयास कर रहे हैं। राज्य सरकार ने हर परिस्थिति में सेवाएं निर्बाध रखने की ठोस व्यवस्था कर रखी है। हीलियम और MRI को लेकर डर फैलाना सिर्फ राजनीतिक नौटंकी है। सच्चाई यह है कि राज्य सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं और सेवाएं बाधित नहीं होंगी।
IPD टॉवर—बिना प्लानिंग का स्मारक
खींवसर ने कहा कि पूर्व सरकार ने बिना पार्किंग, बिना विशेषज्ञ सलाह, बिना बजट के बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए—यह उनकी जल्दबाजी और दिखावे की राजनीति थी। हमारी सरकार ने इन्हें बंद नहीं किया, बल्कि सुधार कर आगे बढ़ाया—यही जिम्मेदारी है। IPD टॉवर बिना प्लानिंग का ही स्मारक था। हमारी सरकार अतिरिक्त बजट और सुविधाएं बढ़ाकर इसे बेहतर योजना के साथ पूरा कर रही है।
मेडिकल कॉलेज पर भी आधा सच
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को लेकर आधी-अधूरी जानकारी देकर भ्रम फैलाया जा रहा है। यह सब जानते हैं कि वर्ष 2016 तक प्रदेश में 8 ही मेडिकल कॉलेज थे। मेडिकल कॉलेजों की स्थापना केंद्र प्रवर्तित योजना के तहत की जाती है। केंद्र में जब मोदी सरकार बनी तो उन्होंने हर जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए हर जिले में मेडिकल कॉलेज की सोच के साथ नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी। उसका परिणाम रहा कि 2016 के बाद 23 नए मेडिकल कॉलेज राजस्थान में शुरू हुए। अगर कांग्रेस की नीतियों से ही इतने मेडिकल कॉलेज खुले होते तो राजस्थान में 2016 तक 8 ही मेडिकल कॉलेज नहीं होते।
जिला अस्पतालों पर बयान—पूरी तरह भ्रामक
जिला अस्पतालों को रेफरल सेंटर बताना और ऑक्सीजन प्लांट्स पर सवाल उठाना साफ तौर पर झूठ फैलाने का प्रयास है। हकीकत यह है कि हमारी सरकार ने हर स्तर पर सेवाओं को मजबूत किया है। पिछली सरकार के समय 49 जिला अस्पताल थे, अब 63 हैं। स्वास्थ्य केंद्रों को आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में बदलकर 7 से बढ़ाकर 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं शुरू की गई हैं। सीएचओ की भर्ती से उप स्वास्थ्य केंद्रों में भी प्रभावी रूप से सेवाएं मिल रही हैं। टेलीमेडिसिन की सुविधा से लोगों को उपचार लेने में आसानी हुई है। कांग्रेस सरकार ने भर्ती के नाम पर सिर्फ विज्ञापन निकाले थे, इसलिए स्टाफ के अभाव में उस समय जिला या उससे निचले स्तर के अस्पताल सिर्फ रेफरल सेंटर थे। हमने दो साल में ही 35 हजार पदों पर भर्तियां की, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों तक स्वास्थ्य संस्थान सुचारू रूप से चल रहे हैं। कांग्रेस सरकार के समय विशेषज्ञों की नियुक्ति के अभाव में ज्यादातर ट्रोमा और एफआरयू सेंटर बंद पड़े थे, हमने इनमें विशेषज्ञ चिकित्सक लगाकार क्रियाशील किया है।
जनता सब जानती है
चिकित्सा मंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार के समय योजनाओं का उद्देश्य जनसेवा नहीं, बल्कि चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाना था। आज जब पारदर्शिता लाई जा रही है, तो वही लोग असहज हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार अंत्योदय, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांत पर काम कर रही है और भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। विपक्ष चाहे जितना भ्रम फैलाए, लेकिन सच्चाई यह है कि वर्तमान सरकार व्यवस्था सुधार रही है, सिस्टम साफ कर रही है और स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रही है।
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