केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज लोक सभा में परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि इन तीन विधेयकों के बाद लोकसभा में दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व काफी कम हो जाएगा और उन्हें बड़ा नुकसान होगा।
गृह मंत्री ने कहा कि परिसीमन विधेयक 2026 से दक्षिण के राज्यों को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होगा। उन्होंने कहा कि 50% वृद्धि मॉडल के बाद लोक सभा की वर्तमान 543 सीटों की संख्या 816 हो जाने से दक्षिण के सभी राज्यों की सीटों की संख्या बढ़ जाएगी। गृह मंत्री ने कहा कि लोक सभा में दक्षिण के राज्यों की मौजूद 129 सीटों की संख्या बढ़कर 195 हो जाएगी और सदन की कुल सीटों में दक्षिण के राज्यों की सीटों का प्रतिशत भी मौजूदा लगभग 24 प्रतिशत के समान रहेगा।
अमित शाह ने कहा कि 543 सदस्यों वाले इस सदन में वर्तमान में कर्नाटक से 28 सदस्य हैं, जो कुल संख्या का लगभग 5.15 प्रतिशत है। प्रस्तावित विधेयकों के पारित होने तथा संविधान संशोधन के उपरांत कर्नाटक की सीटों की संख्या 28 से बढ़कर 42 हो जाएगी। इस स्थिति में 816 सदस्यों वाली लोकसभा में कर्नाटक का प्रतिनिधित्व लगभग 5.14 प्रतिशत रहेगा। अतः कर्नाटक को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।
गृह मंत्री ने कहा कहा कि वर्तमान में आंध्र प्रदेश की 25 सीटें हैं और 543 सदस्यों वाले सदन में उसका प्रतिनिधित्व लगभग 4.60 प्रतिशत है। प्रस्तावित परिवर्तन के बाद लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि के साथ सीटों की संख्या बढ़कर 38 हो जाएगी और आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व बढ़कर लगभग 4.65 प्रतिशत हो जाएगा। वहीं तेलंगाना में वर्तमान में 17 सीटें हैं और मौजूदा लोक सभा में उसका प्रतिनिधित्व लगभग 3.13 प्रतिशत है। प्रस्तावित वृद्धि के बाद सीटों की संख्या बढ़कर 26 हो जाएगी और प्रतिनिधित्व लगभग 3.18 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।
अमित शाह ने कहा कि वे तमिलनाडु की जनता को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनकी शक्ति कम नहीं होगी बल्कि बढ़ रही है। तमिलनाडु में प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा, बल्कि बढ़ेगा। वर्तमान में तमिलनाडु से 39 सदस्य चुनकर आते हैं, जो 543 सदस्यों वाले सदन का लगभग 7.18 प्रतिशत है। प्रस्तावित 50 प्रतिशत वृद्धि के बाद सीटों की संख्या बढ़कर लगभग 59 हो जाएगी और 816 सदस्यों वाले नए सदन में इसका प्रतिनिधित्व लगभग 7.23 प्रतिशत हो जाएगा। अतः स्पष्ट है कि इन राज्यों के प्रतिनिधित्व में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि वृद्धि ही होगी।
गृह मंत्री ने कहा कि केरलम में वर्तमान में 20 लोक सभा सांसद हैं, जो 543 सदस्यों वाले सदन में लगभग 3.68 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रस्तावित वृद्धि के बाद यह संख्या 20 से बढ़कर 30 हो जाएगी और प्रतिनिधित्व लगभग 3.67 प्रतिशत रहेगा।
अमित शाह ने कहा कि यदि समग्र रूप से दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व को देखा जाए, तो वर्तमान में 543 सदस्यीय सदन में 129 सांसद दक्षिणी राज्यों से आते हैं, जो लगभग 23.76 प्रतिशत है। प्रस्तावित 50 प्रतिशत वृद्धि के बाद यह संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी और 816 सदस्यीय सदन में उनका प्रतिनिधित्व लगभग 23.87 प्रतिशत, अर्थात लगभग 24 प्रतिशत हो जाएगा। इससे स्पष्ट है कि दक्षिणी राज्यों की कुल प्रतिनिधित्व क्षमता में वृद्धि होगी।
गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया है और आगामी जनगणना में जाति से संबंधित आंकड़े भी संकलित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जनगणना दो चरणों में संपन्न होती है—पहले चरण में सभी मकानों/आवासीय इकाइयों का सूचीकरण किया जाता है, और दूसरे चरण में उनमें रहने वाले व्यक्तियों की गणना की जाती है। गृह मंत्री ने कहा कि व्यक्तियों के आंकड़े संकलित करते समय ही जाति से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
अमित शाह ने कहा कि सरकार ने परिसीमन आयोग अधिनियम (Delimitation Commission Act) में कोई बदलाव नहीं किया है, बल्कि पूर्ववर्ती प्रावधानों को ही यथावत रखा है। उन्होंने कहा कि यदि अतीत में इस अधिनियम का उपयोग किसी प्रकार के हेरफेर के लिए किया गया होगा, तो उस पर वे टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन वर्तमान सरकार ने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया है। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग की रिपोर्ट तभी लागू होगी, जब संसद उसे अनुमोदित करेगी और राष्ट्रपति महोदया की स्वीकृति प्राप्त होगी। इसलिए यह प्रक्रिया 2029 से पहले लागू होने का प्रश्न ही नहीं उठता। वर्ष 2029 तक होने वाले सभी चुनाव वर्तमान व्यवस्था और मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही संपन्न होंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का निर्धारण नागरिकों के मत और उनकी सोच से होता है, न कि केवल राजनीतिक दलों या नेताओं द्वारा। उन्होंने कहा कि 130 करोड़ लोगों के जनमत में कोई भी हेरफेर नहीं कर सकता। यदि ऐसा संभव होता, तो पूर्व में सत्ता परिवर्तन नहीं होते। उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल के दौरान भी जनमत को स्थायी रूप से प्रभावित नहीं किया जा सका, और जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना निर्णय सुनाया। शाह ने जोर देकर कहा कि देश में लोकतंत्र को समाप्त करने की किसी में भी क्षमता नहीं है। इतिहास साक्षी है कि जब भी ऐसा प्रयास किया गया, जनता ने उसे अस्वीकार कर दिया।


