हर्षित नागदा की रिपोर्ट
फीफा विश्व कप 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में अर्जेंटीना ने मिस्र को 3–2 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। हालांकि मैच के बाद जीत से ज्यादा चर्चा रेफरी के फैसलों और VAR (वीडियो असिस्टेंट रेफरी) के इस्तेमाल को लेकर हो रही है।
मुकाबले में मिस्र ने शुरुआती बढ़त बनाते हुए 2–0 की बढ़त हासिल की थी, लेकिन अर्जेंटीना ने दूसरे हाफ में वापसी करते हुए मैच अपने नाम कर लिया। इसके बाद मिस्र फुटबॉल महासंघ, टीम के मुख्य कोच होसाम हसन और कई खिलाड़ियों ने रेफरिंग पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि VAR समीक्षा के बाद मिस्र का एक अहम गोल रद्द किया गया, पेनाल्टी की अपील ठुकरा दी गई और कई फैसले अर्जेंटीना के पक्ष में गए।
कोच होसाम हसन ने कहा कि उनकी टीम के साथ “अन्याय” हुआ और उन्होंने रेफरिंग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। मिस्र फुटबॉल महासंघ ने मामले की आधिकारिक शिकायत फीफा से करते हुए मैच की समीक्षा की मांग की है।
सोशल मीडिया पर भी विवाद तेज हो गया है। #RiggedWorldCup और #JusticeForEgypt जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे, जहां कई प्रशंसकों ने मैच अधिकारियों के फैसलों की आलोचना की।
हालांकि फीफा ने सभी आरोपों को खारिज किया है। रेफरिंग प्रमुख पियरलुइजी कोलिना ने कहा कि मैच अधिकारियों ने खेल के नियमों के अनुरूप फैसले लिए और VAR का उपयोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया गया। उन्होंने कहा कि रेफरी स्वतंत्र रूप से निर्णय लेते हैं और उन पर किसी तरह का बाहरी दबाव नहीं होता।
फुटबॉल विशेषज्ञों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि VAR के कुछ फैसले विवादित रहे, जबकि अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे मैच में पक्षपात या फिक्सिंग का निष्कर्ष निकाला जा सके।
इस बीच, फ्रांस और मोरक्को के आगामी मुकाबले के लिए अर्जेंटीना से जुड़े अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर भी सोशल मीडिया पर सवाल उठे हैं। हालांकि फीफा ने इसे नियमित नियुक्ति प्रक्रिया बताते हुए किसी भी तरह के पक्षपात से इनकार किया है।
अर्जेंटीना अब क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुका है, जबकि मिस्र का अभियान समाप्त हो गया है। इसके बावजूद यह मुकाबला रेफरिंग, VAR और बड़े टूर्नामेंटों में पारदर्शिता को लेकर जारी बहस के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहने की संभावना है।

