जयपुर, 11 अक्टूबर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दिल्ली में आंदोलन के दौरान पैदा हुए हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार सरकार आंदोलन को दबाने के लिए कदम उठा रही है और रेल एवं मेट्रो सेवाएं बंद करने जैसी स्थिति पैदा हुई है, उससे देश के हालात की गंभीरता समझी जा सकती है।
रविवार को दिल्ली रवाना होने से पूर्व अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में गहलोत ने कहा कि स्थिति यह हो गई कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को भी रविवार को सुनवाई करनी पड़ी। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हुए दुर्व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि विपक्ष को जो सम्मान मिलना चाहिए, वह नहीं मिल रहा है। लोकतंत्र की बुनियाद असहमति का सम्मान करना है। विपक्ष के बिना पक्ष का भी कोई अर्थ नहीं है, लेकिन आज देश में असहमति के लिए जगह लगातार सीमित होती दिखाई दे रही है।
दिल्ली में इस तरह की सख्ती और लोगों के साथ दुर्व्यवहार क्यों?
गहलोत ने कहा कि दिल्ली में जिस तरह व्यापक स्तर पर बैरिकेडिंग की गई, देशभर से आने वाले लोगों को रेलवे स्टेशनों पर रोका गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, वह चिंताजनक है। ये सभी देश के नागरिक हैं, कोई बाहरी लोग नहीं हैं। सरकार आखिर चाहती क्या है, यह समझ से परे है। नेताओं को पकड़ना, कुछ लोगों को छोड़ना और पूरे घटनाक्रम में जिस तरह की सख्ती बरती जा रही है, उससे ऐसा माहौल बन गया है मानो कोई बड़ा क्रैकडाउन चल रहा हो। दिल्ली में मीडिया और आम लोगों के बीच भी यही चर्चा है कि इस तरह की कार्रवाई की जरूरत ही क्या थी। सरकार के इस रवैये से राजधानी में भय और अव्यवस्था का माहौल बनना गंभीर चिंता का विषय है।
सरकार संवाद करती तो निकल सकता था रास्ता :
गहलोत ने कहा कि यदि सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करती है, तो उसे विपक्ष को बुलाकर बातचीत करनी चाहिए थी। विपक्ष से पूछा जाना चाहिए था कि उसे चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को लेकर क्या आपत्तियां हैं और उसकी चिंताओं का आधार क्या है। विपक्ष अपनी बात रखता और सरकार अपना पक्ष सामने रखती। लोकतंत्र में संवाद का यही तरीका है। बातचीत के जरिए या तो विपक्ष सरकार के पक्ष को समझ सकता था या प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य मंत्री विपक्ष को अपनी बात समझा सकते थे। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया को अपनाने के बजाय भाजपा द्वारा टकराव का रास्ता चुना जा रहा है।
वोट चोरी और SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों का जवाब दे सरकार :
गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी लगातार डेढ़-दो वर्षों से वोट चोरी और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। इन सवालों की निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर जवाब देना आवश्यक है। सरकार को विपक्ष की आवाज दबाने के बजाय उसके सवालों का जवाब देना चाहिए।
लोकतंत्र बचाना देश की नई पीढ़ी के भविष्य के लिए जरूरी :
गहलोत ने कहा कि देश में मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं। लोकतंत्र केवल सरकार चलाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि नागरिकों के अधिकारों, असहमति के सम्मान और जवाबदेही की बुनियाद है। देशवासियों, विशेषकर नई पीढ़ी को समझना होगा कि लोकतंत्र की रक्षा करना उनके अपने भविष्य की रक्षा करना है। देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और संस्थाओं को मजबूत बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।

