जयपुर, दिनांक 21 अप्रैल 2026। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की वर्तमान सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि भाजपा सरकार जनहित के मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है। मंगलवार को अपने निवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में गहलोत ने तथ्यों के साथ सरकार की घेराबंदी की।
गहलोत ने कहा कि रिफाइनरी जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में आग की घटना पर कहा है या तो यह चूक है या दबाव पड़ा होगा कि जल्दी कीजिए।उन्होंने ‘इंतज़ारशास्त्र’ का उल्लेख करते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा कि बयानबाजी के इतर धरातल पर कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।
महिला आरक्षण के विषय पर भाजपा की ‘कथनी और करनी’ के अंतर को साफ करते हुए उन्होंने कहा कि परिसीमन का मुद्दा था न कि महिला आरक्षण का ।
वहीं आदर्श घोटाले में हितों का टकराव जगजाहिर होने के बावजूद सरकार द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने पर कहा है कि सरकार और आरोपी में सांठगांठ है तथा सरकार को गरीबों के साथ न्याय से कोई मतलब नहीं है।
रिफाइनरी के लोकार्पण में देरी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल :
रिफाइनरी में आग लगने की घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अशोक गहलोत ने बताया कि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के एक विशेषज्ञ केमिकल इंजीनियर से इस विषय पर चर्चा की। उन्होंने कहा, “विशेषज्ञ के अनुसार 20–25 वर्ष पुरानी रिफाइनरी में आग लगना तकनीकी कारणों से संभव हो सकता है, लेकिन किसी नई रिफाइनरी में इस प्रकार की घटना होना असामान्य है। उनके मत में नई रिफाइनरी में आग लगने के पीछे या तो कोई चूक हुई है या फिर जल्दबाज़ी में कार्य पूरा करने का मनोवैज्ञानिक दबाव रहा होगा।”
इंतज़ार शास्त्र’ सीरीज़ और सरकार की विफलता :
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस सरकार के समय शुरू किए गए जनहित के प्रोजेक्ट्स की वर्तमान में हो रही दुर्दशा पर चलाई गई अपनी सोशल मीडिया सीरीज़ इंतज़ार शास्त्र को बेहद लोकप्रिय बताते हुए भाजपा नेताओं द्वारा की गई ऊलजलूल टिप्पणियों पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि इंतज़ार शास्त्र के कारण पूरी सरकार ही डिफेंस में आ गई, बयानबाजी खूब की परन्तु तथ्यों के साथ जवाब नहीं दे पाए कि कौन सा प्रोजेक्ट कब शुरू होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व होता है कि वो जवाब दे।
PHED में भुगतान संकट और ठेकेदारों का अल्टीमेटम :
उन्होंने एक और बड़ा महत्वपूर्ण विषय उठाते हुए कहा कि PHED में पिछले 33 महीनों से लगभग 4500 करोड़ रुपये का भुगतान अटका होने को लेकर प्रदेशभर के ठेकेदार अब आर पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं. जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ठेकेदारों और औद्योगिक संगठनों ने सरकार को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए ‘भुगतान नहीं तो काम नहीं’ और ‘पानी रोको आंदोलन’ शुरू करने की चेतावनी दी है।
जिस उद्देश्य से RGHS योजना शुरू की थी, उसे विफल किया जा रहा है :
अशोक गहलोत ने कांग्रेस सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरह से लागू न होने पर दुःख जताते हुए कहा कि RGHS को लेकर पूरा पेंशनर समाज दुखी है। जिस उद्देश्य से हमने RGHS योजना शुरू की थी, उसे विफल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि कुछ लोगों ने बेईमानी की है तो इसका अर्थ यह नहीं कि पूरी योजना को ही बर्बाद कर दिया जाए। मेडिकल स्टोर्स के हजारों करोड़ रुपये बकाया हैं।
वहीं एफआईआर दर्ज करने को अनिवार्य बनाए जाने संबंधी उनकी घोषणा को याद करते हुए गहलोत ने कहा कि एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य किया गया था, जिसका PHQ ने विरोध भी किया। एक बार इस योजना को रोक दिया गया था और मुझे समझाया गया, लेकिन बाद में मैंने पुनः इसकी घोषणा की। अन्नपूर्णा किट योजना बहुत लोकप्रिय थी।
किसान हित में बड़ी आवाज़ उठाते हुए गहलोत ने किसान कर्जमाफी की मांग की है । उन्होंने कहा कि किसान आज दबाव और कठिनाइयों में है। जिस पैटर्न पर हमने पहले कर्जमाफी की थी, उसी तरह दोबारा किसान कर्जमाफी की जानी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री के किसानों को लेकर दिए बयान कि किसान बीस पच्चीस दिन ही काम करता है को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री ने किसानों की बड़ी बेइज्जती की है तथा इसको लेकर किसानों में बेहद आक्रोश है।
महिला आरक्षण: भाजपा के भ्रामक दावों का पर्दाफाश :
महिला आरक्षण के विषय पर भाजपा द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे तथ्यों को भ्रामक बताते हुए गहलोत ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि हाल ही में संसद में जो विधेयक लाए गए थे वो परिसीमन से जुड़े मुद्दे पर थे । गहलोत ने वस्तुस्थिति पर जोर देते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक तो सितंबर 2023 में ही संसद के दोनों सदनों द्वारा सर्वसम्मति से पारित होकर कानून का रूप ले चुका है।
एनडीए सरकार की नीयत में खोट बताते हुए गहलोत ने कहा कि तीन वर्ष होने के बावजूद इस कानून का नोटिफिकेशन जारी नहीं किया था और अब जाकर इस कानून का नोटिफिकेशन जारी किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाल में दिए राष्ट्र के नाम संबोधन को गहलोत ने राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि ऐसा कभी नहीं किया जाता है कि राष्ट्र के नाम संबोधन में राजनीतिक भाषण दिया जाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की बात कही थी लेकिन सरकार ने विपक्ष की मांग को अनसुना कर दिया।
महिला आरक्षण की चर्चा करते हुए गहलोत ने इस ओर भी ध्यान दिलाया कि ऐसे वक़्त जब महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं , प्रदेश में महिला आयोग के अध्यक्ष का पद खाली पड़ा है।
पंचायत एवं नगरीय निकायों के चुनाव में हो रहा विलंब संवैधानिक तौर पर सही नहीं :
पंचायत एवं नगरीय निकायों के चुनाव में हो रहे विलंब पर कड़ा एतराज जताते हुए गहलोत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243 के प्रावधानों और राजस्थान उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के अनुरूप ये चुनाव अब तक संपन्न हो जाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि संवैधानिक अनिवार्यताओं की इस प्रकार अनदेखी करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विरुद्ध है।
गहलोत ने याद दिलाया कि एक बार कांग्रेस सरकार के समय हड़ताल के चलते चुनाव न करवाने की अपील की गई थी जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया था और चुनाव करवाए गए थे।
आदर्श घोटाला: सरकार और आरोपियों की मिलीभगत :
आदर्श क्रेडिट घोटाला मामले में सरकार और आरोपी पक्ष की मिलीभगत का पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा सत्र में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी यह मुद्दा उठाया था और प्रेस वार्ता भी की थी कि राजस्थान सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस केस की पैरवी कर रहे वकील शिवमंगल शर्मा और उनकी लॉ फर्म ‘ऑरा एंड कंपनी’ का इस घोटाले के आरोपियों के साथ गहरा संबंध है। यह हितों से टकराव का मुद्दा है लेकिन राज्य सरकार इस पर कार्रवाई नहीं कर रही है और यह साबित करता है कि सरकार और आरोपी मिले हुए हैं।

