जयपुर घोषणापत्र को ब्रिक्स की मंजूरी:एआई,सतत पर्यटन और आसान यात्रा पर सहयोग बढ़ाने की सहमति

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जयपुर, 21 अगस्त 2026 — भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक शुक्रवार को जयपुर में संपन्न हुई, जहां सदस्य देशों ने ‘जयपुर घोषणापत्र’ को सर्वसम्मति से पारित किया। इस घोषणापत्र में पर्यटन क्षेत्र में कृत्रिम मेधा यानी एआई के इस्तेमाल, सतत और जिम्मेदार पर्यटन, कौशल विकास तथा सदस्य देशों के बीच यात्रा को अधिक सुगम बनाने पर सहयोग बढ़ाने की रूपरेखा तय की गई।

बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने की। उनके अनुसार, जयपुर घोषणापत्र केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन सहयोग को व्यावहारिक रूप देने की साझा प्रतिबद्धता है।

पर्यटन में एआई और जिम्मेदार विकास पर जोर

भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत पर्यटन ट्रैक की थीम ‘रिजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी’ रखी गई थी।

जयपुर बैठक में चार प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई—

  • पर्यटन में एआई और डिजिटल तकनीक का उपयोग
  • सतत और जिम्मेदार पर्यटन
  • कौशल विकास और क्षमता निर्माण
  • पर्यटन आदान-प्रदान और निर्बाध यात्रा सुविधाएं

घोषणापत्र में पर्यटन योजना, गंतव्य प्रबंधन, आगंतुक सेवाओं और बहुभाषी संचार में एआई और डिजिटल तकनीक के जिम्मेदार तथा मानव-केंद्रित उपयोग पर जोर दिया गया।

साथ ही प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, पर्यटन निवेश, नए पर्यटन उत्पादों के विकास और सदस्य देशों के बीच डेटा तथा सर्वोत्तम अनुभवों को साझा करने की बात कही गई।

शेखावत बोले— पर्यटन केवल अर्थव्यवस्था नहीं, लोगों को जोड़ने का माध्यम

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेखावत ने कहा कि पर्यटन में आर्थिक गतिविधियों को बड़े शहरों से आगे कस्बों, गांवों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचाने की क्षमता है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन होटल और होमस्टे से लेकर टैक्सी चालकों, गाइडों, कारीगरों, बुनकरों, किसानों और उद्यमियों के लिए रोजगार और नए अवसर पैदा करता है।

शेखावत के अनुसार, पर्यटन देशों के बीच केवल औपचारिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अलग-अलग समाजों और संस्कृतियों के लोगों को एक-दूसरे को समझने का अवसर भी देता है।

‘जयपुर डिक्लेरेशन’ से वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर बढ़ेगी शहर की पहचान

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसी अंतरराष्ट्रीय घोषणा के साथ जयपुर का नाम जुड़ना शहर और राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन के पास जाने के बाद भी पर्यटन सहयोग से जुड़े फैसलों के संदर्भ में जयपुर घोषणापत्र का उल्लेख होता रहेगा।

उनके मुताबिक, इससे जयपुर की वैश्विक पर्यटन पहचान को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

शेखावत ने यह भी कहा कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटक औसतन 18 दिन देश में ठहरते हैं और भारत की भौगोलिक तथा सांस्कृतिक विविधता को देखते हुए इस अवधि को बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।

पर्यटन में बढ़ती भीड़ और ओवरटूरिज्म की चुनौती

बैठक में लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर बढ़ते पर्यटक दबाव और उससे पैदा होने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।

शेखावत ने कहा कि जयपुर को फिलहाल ओवरटूरिज्म का शिकार नहीं कहा जा सकता, लेकिन प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए बेहतर डेस्टिनेशन मैनेजमेंट की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन विकसित करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। गुजरात के एकता नगर के मॉडल का भी उल्लेख किया गया, जहां पर्यटन प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की गई है।

ब्रिक्स देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी

पर्यटन मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत ने ब्राजील, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इनमें पर्यटन सहयोग और आपसी संपर्क बढ़ाने के मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रतिनिधियों के लिए जयपुर की कला, शिल्प और समुदाय आधारित पर्यटन पहलों को भी प्रदर्शित किया गया।

22 अगस्त को ब्रिक्स के मंत्री और प्रतिनिधि हवा महल, सिटी पैलेस और आमेर किले सहित जयपुर के प्रमुख विरासत स्थलों का दौरा करेंगे।

यात्रा को आसान बनाने पर सहमति, साझा वीजा व्यवस्था नहीं

शेखावत ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने पर चर्चा हुई है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जयपुर घोषणापत्र में किसी साझा वीजा व्यवस्था या वीजा ऑन अराइवल समझौते का फैसला नहीं किया गया है।

हर सदस्य देश अपनी वीजा नीति स्वतंत्र रूप से तय करेगा, जबकि ब्रिक्स स्तर पर यात्रा अनुभव को बेहतर और अधिक सुविधाजनक बनाने के उपायों पर सहयोग बढ़ाने की सहमति बनी है।

स्थानीय समुदायों को केंद्र में रखने की कोशिश

जयपुर घोषणापत्र का एक प्रमुख उद्देश्य पर्यटन के लाभ को स्थानीय समुदायों तक पहुंचाना भी है। सदस्य देशों ने पर्यटन क्षेत्र में निवेश, रोजगार, कौशल विकास और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

शेखावत ने कहा कि ब्रिक्स बैठकों और घोषणाओं को केवल सम्मेलन कक्षों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनका लक्ष्य ऐसे परिणाम हासिल करना होना चाहिए, जिनका असर पर्यटन उद्योग के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों तक भी पहुंचे।

जयपुर में हुई यह बैठक भारत की 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत पर्यटन ट्रैक का समापन मानी जा रही है और ‘जयपुर घोषणापत्र’ को आने वाले वर्षों में सदस्य देशों के बीच पर्यटन सहयोग के लिए एक साझा रूपरेखा के तौर पर देखा जाएगा।