नई दिल्ली: UPI पेमेंट को लेकर एक अहम बदलाव की बात सामने आई है। दिए गए विवरण के मुताबिक, ₹2,000 से ज्यादा के UPI लेनदेन पर 0.4 फीसदी शुल्क लिया जाएगा। हालांकि, इस शुल्क का भुगतान ग्राहक नहीं बल्कि मर्चेंट यानी दुकानदार या कारोबारी करेंगे। इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन बताई गई है।
वहीं, ₹2,000 तक के UPI पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं होगा। दिए गए विवरण के अनुसार, RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान को भी इस छूट में शामिल किया गया है।
बड़े पेमेंट पर क्यों लगाया जा रहा है शुल्क?
इस बदलाव के पीछे बड़ी वजह बड़े कारोबारी लेनदेन बताए जा रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को UPI के जरिए करीब ₹198 लाख करोड़ का भुगतान हुआ।
इनमें ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन संख्या के हिसाब से सिर्फ करीब 4 फीसदी थे, लेकिन इनकी कुल रकम लगभग ₹131 लाख करोड़, यानी कुल भुगतान का करीब 66 फीसदी थी।
MDR क्या है और इसका भुगतान कौन करेगा?
MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के लिए कारोबारी से लिया जाने वाला शुल्क है। यह शुल्क आम तौर पर ग्राहक के बजाय मर्चेंट से जुड़ा होता है।
हालांकि, कारोबारी की लागत बढ़ने पर इसका अप्रत्यक्ष असर सामान या सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इसका वास्तविक असर बाजार और आगे तय होने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।
छोटे दुकानदारों को क्या राहत मिलेगी?
दिए गए विवरण के मुताबिक, हर महीने ₹1 लाख तक UPI भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे दुकानदारों के लेनदेन पर शुल्क नहीं लगेगा।
इसके अलावा UPI ऐप कंपनियों को किसी तरह की छिपी हुई या अतिरिक्त प्लेटफॉर्म फीस लगाने की अनुमति नहीं होगी। बैंकों को भी सलाह दी गई है कि मर्चेंट से लिया जाने वाला MDR ग्राहकों से न वसूला जाए।
सरकार UPI के लिए पहले भी दे चुकी है इंसेंटिव
UPI को बढ़ावा देने और इसे छोटे कारोबारियों के लिए मुफ्त रखने के लिए सरकार ने 2021-22 में प्रोत्साहन योजना शुरू की थी। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 तक इस योजना के तहत करीब ₹8,276 करोड़ का इंसेंटिव दिया गया।
जून 2026 तक देश में करीब 55.5 करोड़ UPI यूजर्स होने का दावा भी इस जानकारी में किया गया है।
विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने UPI पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। उनका सवाल है कि अगर शुल्क दुकानदारों से लिया जाएगा तो अंततः इसका बोझ ग्राहकों पर पड़ सकता है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार की आलोचना करते हुए इसे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला कदम बताया।
UPI का नेटवर्क कितना बड़ा है?
दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 तक 741 बैंक UPI नेटवर्क से जुड़े थे। जुलाई में करीब 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी कुल रकम लगभग ₹29.88 लाख करोड़ रही।
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी करीब 84 फीसदी बताई गई है।
यानी UPI अब छोटे दुकानदारों से लेकर ऑनलाइन खरीदारी और बड़े कारोबारी भुगतान तक डिजिटल लेनदेन का एक प्रमुख माध्यम बन चुका है।

